MGNREGA Computer Operators: झारखंड हाईकोर्ट ने मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसियों के अधीन भेजना उचित नहीं है.
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से सरकारी योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों और सेवा सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती.
10 वर्ष से अधिक सेवा देने वालों को मिलेगा नियमों का संरक्षण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों को वर्ष 2007 की सेवा नियमावली का संरक्षण मिलना चाहिए. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के लिए स्वीकृत पद सृजित किए जाएं और उन्हें उन पदों पर समायोजित किया जाए.
15 वर्षों से मनरेगा में दे रहे हैं सेवा
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से मनरेगा योजना में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्य कर रहे हैं. उनका कहना था कि सरकार अब उन्हें आउटसोर्सिंग कंपनियों के अधीन भेजना चाहती है. इससे उनकी नौकरी की सुरक्षा, वेतन और अन्य सेवा लाभ प्रभावित होंगे.
सरकार ने रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति स्वीकृत पदों पर नहीं हुई थी. वे दैनिक मजदूरी के आधार पर कार्यरत थे. सरकार ने दलील दी कि इसी वजह से उन्हें आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत रखने का निर्णय लिया गया है.
कर्मचारियों के हितों पर कोर्ट का जोर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को असुरक्षित व्यवस्था में नहीं धकेला जा सकता. सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे कर्मचारियों के हितों और सेवा सुरक्षा का ध्यान रखा जाए. अदालत के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटरों के समायोजन को लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी.