Ranchi: झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली से जुड़े मामले में तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर अब 9 और 10 जुलाई को सुनवाई होगी। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अलग-अलग कारणों से मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी गई।
दो मामलों में एलसीआर नहीं पहुंची, एक में अभियोजन ने मांगा समय
अदालत में आरोपी कृष्णा कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। वहीं, आदित्य उर्फ मोनू कुमार और सोनू शर्मा की याचिकाओं पर सुनवाई इसलिए नहीं हो सकी क्योंकि संबंधित लोअर कोर्ट रिकॉर्ड (LCR) अदालत में उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसके बाद कोर्ट ने दोनों मामलों के लिए नई तिथि तय कर दी।
मास्टरमाइंड समेत कई आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में
इस मामले में कथित मास्टरमाइंड अतुल वत्स के अलावा गिरोह से जुड़े विकास कुमार, आशीष कुमार, योगेश कुमार, मुकेश कुमार और बिहार से गिरफ्तार तीन अन्य आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं। इनके साथ पांच अभ्यर्थी भी न्यायिक हिरासत में हैं। इन सभी की जमानत याचिकाओं पर भी अदालत में सुनवाई होनी बाकी है।
परीक्षा से पहले उत्तर याद कराने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा 13 अप्रैल को आयोजित होनी थी। आरोप है कि परीक्षा से एक दिन पहले, यानी 12 अप्रैल की रात, अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों के उत्तर याद कराए जा रहे थे। सूचना मिलने पर तमाड़ थाना पुलिस ने रड़गांव में कार्रवाई करते हुए 166 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें कथित सरगना, गिरोह के सदस्य, सात महिलाएं और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल थे।
78 आरोपियों को मिल चुकी है जमानत
इस प्रकरण में अब तक 83 जमानत याचिकाएं अदालत में दाखिल की जा चुकी हैं। इनमें से 78 आरोपियों को राहत मिल चुकी है। शुरुआत में सुनवाई के दौरान तमाड़ पुलिस कई बार केस डायरी अदालत में प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे सुनवाई टलती रही। बाद में न्यायालय के निर्देश पर केस डायरी उपलब्ध कराए जाने के बाद जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया।
नर्सिंग कॉलेज में छापेमारी के दौरान हुआ था खुलासा
पूरे मामले का खुलासा तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में पुलिस की छापेमारी के दौरान हुआ था। जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाने का काम चल रहा था। आरोप है कि गिरोह ने उम्मीदवारों से परीक्षा से पहले तीन लाख रुपये और चयन होने के बाद 10 लाख रुपये लेने का सौदा तय किया था। बताया जाता है कि निर्माणाधीन परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से ग्रामीणों को संदेह हुआ। उन्होंने किसी आपराधिक या नक्सली गतिविधि की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद छापेमारी में पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ।