India Japan Terrorism: भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ अपने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है. दोनों देशों ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों को मिलने वाला संरक्षण और उनके वित्तीय नेटवर्क वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं. संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी अपवाद के ठोस और समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की जरूरत है.
वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया. दोनों नेताओं ने कहा कि खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत किया जाएगा तथा संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए मिलकर काम किया जाएगा. साथ ही आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने, उनकी फंडिंग रोकने और अंतरराष्ट्रीय अपराध से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की आवश्यकता दोहराई गई.
हालिया आतंकी घटनाओं पर जताई कड़ी प्रतिक्रिया
संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई. दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निगरानी टीम की उस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें इस हमले में द रेजिस्टेंस फ्रंट की भूमिका का जिक्र किया गया था. इसके अलावा 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट को भी गंभीर आतंकी घटना बताते हुए दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई.
संयुक्त बयान में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता दोहराई गई. दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद के हर रूप और उसके समर्थन तंत्र को समाप्त करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है.
समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी साझा रुख
भारत और जापान ने क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी समान चिंता व्यक्त की. पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए दोनों देशों ने कहा कि किसी भी पक्ष द्वारा एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने या विवादित क्षेत्रों के सैन्यीकरण से क्षेत्रीय शांति प्रभावित हो सकती है. संयुक्त बयान में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक बताया गया. दोनों देशों ने दोहराया कि आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भविष्य में भी उनका सहयोग लगातार जारी रहेगा.