Jharkhand Crime News: राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से चाईबासा मंडल कारागार शिफ्ट कर लाई गई महिला बंदी रिया सिन्हा के पास से जेल में प्रवेश के दौरान मोबाइल फोन समेत कई प्रतिबंधित सामान बरामद किए गए हैं. मामले को गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए चाईबासा सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस और जेल प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गए हैं.
तलाशी के दौरान मिला मोबाइल और अन्य सामान
प्राथमिकी के अनुसार, शुक्रवार को रिया सिन्हा को सुरक्षा व्यवस्था के बीच चाईबासा मंडल कारागार लाया गया था. महिला वार्ड में प्रवेश से पहले महिला सुरक्षाकर्मियों ने उसकी विस्तृत तलाशी ली.
जांच के दौरान उसके पास से रियलमी कंपनी का एक स्मार्टफोन बरामद हुआ. आरोप है कि उसने मोबाइल को अपने पैंट की जेब में छिपाकर ऊपर से ब्लेजर से ढंक रखा था, ताकि जांच के दौरान किसी की नजर उस पर न पड़े.
तलाशी में चार टूटे हुए सिम कार्ड, वीवो कंपनी का मोबाइल चार्जर, बोट कंपनी का चार्जिंग एडॉप्टर, एक डायरी और लिखावट से भरी एक कॉपी भी बरामद की गई.
सदर थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी
बरामदगी के बाद सदर थाना प्रभारी हीरा लाल महतो के लिखित आवेदन पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने जब्त सामान को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है.
पहले से कई मामलों में आरोपी है रिया सिन्हा
जेल प्रशासन के अनुसार रिया सिन्हा के खिलाफ रंगदारी, धोखाधड़ी सहित कुल 14 आपराधिक मामले विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं. वह झारखंड के कुख्यात सुजीत कुमार सिन्हा की पत्नी है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुजीत सिन्हा लंबे समय से संगठित आपराधिक गिरोह संचालित करने के आरोपों का सामना कर रहा है.
जेल से गिरोह संचालित करने का आरोप
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि सुजीत सिन्हा और रिया सिन्हा जेल में बंद रहने के बावजूद अपने गिरोह के सदस्यों को बाहर से निर्देश देते थे. पुलिस का दावा है कि उनके नेटवर्क के जरिए रंगदारी, लूट, हत्या और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों सहित कई संगठित आपराधिक गतिविधियों का संचालन किया जाता रहा है.
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह पर जेल के भीतर से नेटवर्क संचालित कर अवैध रूप से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करने के भी आरोप हैं. हालांकि इन आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है.
डायरी और मोबाइल की होगी फोरेंसिक जांच
बरामद मोबाइल, सिम कार्ड, डायरी और कॉपी को तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन उपकरणों का उपयोग किन गतिविधियों में किया गया था और इनके जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया.
जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल
पुलिस फिलहाल तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही है-
जेल स्थानांतरण के दौरान कड़ी सुरक्षा के बावजूद मोबाइल, चार्जर और अन्य प्रतिबंधित सामान रिया सिन्हा तक कैसे पहुंचा?
बरामद सिम कार्ड का इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क के लिए किया गया और इनके जरिए किन-किन व्यक्तियों से बातचीत हुई?
डायरी और कॉपी में दर्ज नामों, नंबरों या संभावित कोडवर्ड्स का आपराधिक नेटवर्क से क्या संबंध है?
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में और कौन-कौन लोग संलिप्त हैं तथा जेल सुरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी किसकी है.