West Bengal Anti Social Bill: पश्चिम बंगाल सरकार के प्रस्तावित एंटी सोशल बिल को लेकर राजनीति तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने इस विधेयक पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इसका इस्तेमाल विरोधियों की आवाज दबाने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया जा सकता है. उन्होंने इसे आपातकाल जैसे दौर की याद दिलाने वाला कदम भी बताया.
आपातकाल जैसे हालात बनने का जताया डर
मदन मित्रा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह प्रस्तावित बिल उन्हें आपातकाल के समय की याद दिलाता है. उनके मुताबिक उस दौर में भी ऐसे कानूनों का इस्तेमाल राजनीतिक नेताओं को जेल भेजने के लिए किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था भी उसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा आज उन नीतियों का अनुसरण कर रही है, जिनकी वह पहले आलोचना करती रही है.
बोले, विरोधियों को निशाना बनाने का बन सकता है जरिया
टीएमसी नेता का कहना है कि इस बिल के जरिए किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है और उसे तुरंत सुनवाई का मौका भी नहीं मिल सकता. उन्होंने दावा किया कि पहले भी इसी तरह के कानूनों के तहत कई बड़े नेताओं, जिनमें ज्योति बसु और सीपीएम के नेता भी शामिल थे, को गिरफ्तार किया गया था. उनके अनुसार अगर ऐसा कानून लागू होता है तो इसका इस्तेमाल सरकार के विरोध में बोलने वालों को दबाने के लिए किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि जिन लोगों पर पहले गुंडागर्दी के आरोप लगते थे, वही अब यह तय करने की स्थिति में हैं कि गुंडा किसे कहा जाएगा.
यूसीसी पर फिलहाल टिप्पणी से किया इनकार
समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर पूछे गए सवाल पर मदन मित्रा ने कोई स्पष्ट राय देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जब तक पूरा विधेयक सामने नहीं आता और वह खुद उसका अध्ययन नहीं कर लेते, तब तक इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. उनका कहना था कि किसी भी कानून पर राय बनाने से पहले उसकी पूरी जानकारी होना जरूरी है. हालांकि उन्होंने एंटी सोशल बिल को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य राजनीतिक फायदा उठाना और विरोधियों की आवाज को कमजोर करना हो सकता है.