Ranchi News: रांची रिम्स में कथित एडमिशन और टेंडर अनियमितताओं की जांच के बीच सीआईडी की छापेमारी के बाद संस्थान के निदेशक के इस्तीफे की चर्चा तेज हो गई है. बुधवार को झारखंड सीआईडी की दो टीमों ने रिम्स पहुंचकर डेटा सेंटर, डीन कार्यालय और प्रशासनिक विभाग में कई घंटों तक जांच की. इस दौरान रिम्स निदेशक, डीन, चिकित्सा अधीक्षक और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई.
दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त
सीआईडी की कार्रवाई देर शाम तक चली. जांच टीम ने दोनों मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं. जांच का केंद्र वर्ष 2025 के शैक्षणिक सत्र में हुए एमबीबीएस और बीडीएस नामांकन तथा सफाई टेंडर आवंटन से जुड़ी शिकायतें हैं.
फर्जी प्रमाण पत्र पर नामांकन का आरोप
सीआईडी को शिकायत मिली थी कि वर्ष 2025 में एमबीबीएस के तीन और बीडीएस के एक छात्र का दाखिला कथित फर्जी जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर हुआ था. आरोपों के घेरे में काजल कुमारी, आशीष कुमार और ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाण पत्र, जबकि पप्पू कुमार के दिव्यांगता प्रमाण पत्र हैं.
जांच एजेंसी ने संबंधित प्रमाण पत्रों और नामांकन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है. सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि मूल प्रमाण पत्रों का अनिवार्य सत्यापन किए बिना छात्रों का दाखिला कैसे हुआ और वे लगभग एक वर्ष तक पढ़ाई भी करते रहे.
सफाई टेंडर में भी गड़बड़ी की शिकायत
दूसरा मामला रिम्स के सफाई टेंडर से जुड़ा है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नियमों को दरकिनार कर कुछ पसंदीदा कंपनियों को ठेका दिया गया. सीआईडी टेंडर प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है.
शिकायत सही मिली तो दर्ज होगी एफआईआर
सूत्रों के अनुसार, दोनों मामलों में शिकायतों की पुष्टि होने पर सीआईडी थाना में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी. फिलहाल जांच जारी है और सीआईडी जुटाए गए दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है.