Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-05-28

Karnataka Politics: कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता बदलने की तैयारी तेज, राहुल गांधी के दबाव के बाद सिद्दारमैया ने इस्तीफे पर दी सहमति

Karnataka Politics: कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई महीनों से चल रहा मुख्यमंत्री बदलने का विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की लगातार बैठकों और मंथन के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पद छोड़ने पर सहमति जता दी है. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सत्ता हस्तांतरण के पुराने वादे को निभाने पर जोर दिया, जिसके बाद सिद्दारमैया पीछे हटते नजर आए.
बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व अब जल्द ही कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन कर सकता है और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है.

दिल्ली में चली कई दौर की बैठकों के बाद बना माहौल
सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की लगातार बैठकें चल रही थीं. इन बैठकों में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई बड़े नेता शामिल रहे.

बैठक के दौरान राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए 2023 में हुआ सत्ता साझेदारी का वादा निभाना जरूरी है. दरअसल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद यह चर्चा हुई थी कि सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार ढाई ढाई साल तक मुख्यमंत्री पद साझा करेंगे.

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि सिद्दारमैया तय समय से अधिक अवधि तक मुख्यमंत्री पद पर रह चुके हैं, इसलिए अब नेतृत्व परिवर्तन का समय आ गया है.

सिद्दारमैया ने मांगा था दो हफ्ते का समय
जानकारी के अनुसार सिद्दारमैया ने शुरुआत में पार्टी नेतृत्व से दो सप्ताह का समय मांगा था. वह चाहते थे कि पहले जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर लिया जाए, उसके बाद आगे का फैसला लिया जाए. लेकिन हाईकमान तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था.

सूत्र बताते हैं कि बैठक के दौरान सिद्दारमैया ने यह भी कहा कि 2025 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक लिखित समझौता नहीं हुआ था. हालांकि राहुल गांधी अपने फैसले पर कायम रहे और उन्होंने साफ कर दिया कि पार्टी के पुराने वादे का सम्मान हर हाल में होना चाहिए.

राहुल गांधी ने अलग अलग और संयुक्त बैठक कर समझाया मामला
दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान राहुल गांधी ने सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों के साथ अलग अलग और संयुक्त बैठकें भी कीं. पार्टी नेतृत्व की कोशिश रही कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद कांग्रेस में किसी तरह की अंदरूनी कलह न हो और दोनों गुट एकजुट बने रहें.

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने दोनों नेताओं से साफ कहा कि पार्टी हित सबसे ऊपर है और किसी भी हाल में संगठन कमजोर नहीं पड़ना चाहिए.

वरिष्ठ नेताओं ने भी दी हाईकमान की बात मानने की सलाह
सूत्रों के मुताबिक बाद में सिद्दारमैया ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से भी चर्चा की. दोनों नेताओं ने उन्हें हाईकमान के फैसले का सम्मान करने की सलाह दी.

इसके बाद शाम को सिद्दारमैया ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने करीबी मंत्रियों और सहयोगियों के साथ बैठक की. कुछ नेताओं ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला नहीं लेने की सलाह दी, लेकिन सिद्दारमैया ने साफ संकेत दे दिया कि अब वह नेतृत्व के फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे.

सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा कि वह शुरू से कहते आए हैं कि राहुल गांधी जब कहेंगे तब वह पद छोड़ देंगे और अब जब निर्देश मिल गया है तो वह तुरंत इस्तीफा देने को तैयार हैं.

कांग्रेस के लिए क्यों अहम माना जा रहा यह फैसला 
कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ कर्नाटक की राजनीति नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन से भी जोड़कर देख रहा है. पिछले कई वर्षों में कांग्रेस को कई राज्यों में अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व विवाद का सामना करना पड़ा है.

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सत्ता साझा करने के वादों के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो पाया था. ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान का सख्त रुख पार्टी के अंदर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि अब केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

झारखंड और दूसरे राज्यों में भी जाएगा राजनीतिक संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कर्नाटक में लिया गया यह फैसला दूसरे राज्यों की कांग्रेस इकाइयों तक भी साफ संदेश पहुंचाएगा. पार्टी अब संगठन और नेतृत्व पर मजबूत पकड़ दिखाना चाहती है ताकि आने वाले चुनावों से पहले अंदरूनी विवादों को नियंत्रित किया जा सके.

फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन कब तक होता है और डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी कब सौंपी जाती है.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !