National News: राजस्थान के जैसलमेर जिले से सामने आई एक दर्दनाक तस्वीर ने सरकारी व्यवस्थाओं और गौ संरक्षण के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर रामगढ़ मार्ग स्थित नगर परिषद के डंपिंग यार्ड में बड़ी संख्या में गायों के शव खुले में पड़े मिले. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और गो प्रेमियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है.
डंपिंग यार्ड में फैली दुर्गंध और खुले में पड़े शवों ने इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मृत पशुओं के उचित निस्तारण को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई गई.
ठेकेदार की लापरवाही से बढ़ी समस्या, शवों का लग गया ढेर
जानकारी के अनुसार नगर परिषद द्वारा अधिकृत ठेकेदार की लापरवाही इस पूरे मामले की बड़ी वजह मानी जा रही है. आरोप है कि मृत पशुओं का समय पर निस्तारण नहीं किया गया, जिसके कारण डंपिंग यार्ड में शव लगातार जमा होते गए और हालात भयावह हो गए.
स्थानीय गो प्रेमियों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि मंचों से गौ माता की रक्षा और सम्मान की बातें की जाती हैं, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि गायों को इस तरह खुले में सड़ने के लिए छोड़ देना बेहद अमानवीय और शर्मनाक है.
वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया प्रशासन
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ. जैसलमेर जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है. वहीं नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढा ने लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार गोपाराम को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
नगर परिषद की ओर से दावा किया गया है कि डंपिंग यार्ड में पड़े शवों को अब हटाकर उनका विधिवत निस्तारण कर दिया गया है. हालांकि स्थानीय लोग इस कार्रवाई को देर से उठाया गया कदम बता रहे हैं.
गौशालाओं की बदहाली और अव्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद क्षेत्र में गौशालाओं की स्थिति और पशुओं की देखभाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि चारे और पानी की कमी, बीमार गायों के इलाज में लापरवाही और संसाधनों की बदहाली जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं.
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल दावे और नारों से काम नहीं चलेगा. भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों इसके लिए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए. साथ ही मृत पशुओं के निस्तारण और गौशालाओं की निगरानी को लेकर स्थायी समाधान लागू करने की भी मांग की जा रही है.
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर गौ संरक्षण को लेकर किए जाने वाले बड़े बड़े दावे जमीन पर कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं.