UNSC 2026: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सशस्त्र संघर्षों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आयोजित वार्षिक खुली बहस में भारत ने वैश्विक शांति के लिए कड़ा रुख अपनाया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए नागरिकों की मौत के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" नीति की वकालत की. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि लगातार तीन वर्षों की बढ़ोतरी के बाद वर्ष 2025 में नागरिक मौतों के आंकड़ों में कुछ कमी आई है, फिर भी दुनिया के 20 बड़े सशस्त्र संघर्षों में 37 हजार से अधिक आम नागरिकों की जान गई है. भारत ने युद्ध के बदलते स्वरूप, शहरी इलाकों में मिसाइल व बमों के प्रयोग और ड्रोन तकनीक व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रखने की मांग की.
सीमा पार आतंकवाद पर वार और अफगानिस्तान हिंसा को लेकर पाकिस्तान का पर्दाफाश
बहस के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामलों का मुद्दा उठाने की कोशिश की, तो भारतीय प्रतिनिधि ने उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बुरी तरह बेनकाब कर दिया. भारत ने स्पष्ट कहा कि सीमा पार आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक विवाद के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता और आतंकियों को पनाह देने वाले देशों को जवाबदेह बनाना ही होगा. भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 2026 की शुरुआती तिमाही में अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा से बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए और इसके पीछे पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे. इसके अतिरिक्त, भारत ने रमजान के दौरान काबुल के एक नशामुक्ति अस्पताल पर हुए अमानवीय हवाई हमले और इतिहास के पन्नों से वर्ष 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान द्वारा किए गए बड़े मानवाधिकार उल्लंघनों की याद दिलाते हुए उसके पूरे रिकॉर्ड को "कलंकित" करार दिया.