Jharkhand News: नक्सलवाद की दुनिया को अक्सर सिर्फ गोलियों, बारूद, जंगल और हिंसा के नजरिए से देखा जाता है. लेकिन इन सबके बीच कई ऐसी कहानियां भी छिपी होती हैं, जो यह बताती हैं कि बंदूक उठाने वाले लोग भी आखिर इंसान ही होते हैं. उनकी जिंदगी में भी रिश्ते होते हैं, भावनाएं होती हैं और कभी कभी मोहब्बत भी उनकी सोच बदल देती है. झारखंड के कुख्यात नक्सली बुधराम मुंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी, जिसने एक समय हथियारों के दम पर अपनी पहचान बनाई, लेकिन बाद में वह अपनी प्रेमिका के लिए उस दुनिया से बाहर निकलना चाहता था.
प्रेमिका के लिए बदलने लगी थी बुधराम मुंडा की सोच
बुधराम मुंडा लंबे समय तक चाईबासा और खूंटी जिले के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहा था. वह नक्सली संगठन में एरिया कमांडर के रूप में काम कर चुका था और कई नक्सली घटनाओं में उसका नाम सामने आया था. जंगलों और हथियारों के बीच रहने वाला बुधराम धीरे धीरे एक अलग जिंदगी का सपना देखने लगा था. बताया जाता है कि उसकी जिंदगी में प्रेम ने बड़ा बदलाव ला दिया था. वह अपनी प्रेमिका के साथ सामान्य जीवन बिताना चाहता था. दोनों के बीच बातचीत का जरिया सिर्फ पत्र हुआ करता था. जंगलों में छिपकर रहने की वजह से वह सीधे संपर्क में नहीं आ पाता था, इसलिए चिट्ठियों के जरिए ही अपने दिल की बातें पहुंचाता था.
संगठन छोड़ने के लिए मांगा था एक साल का समय
बुधराम मुंडा ने अपनी प्रेमिका को एक पत्र लिखकर नक्सली संगठन छोड़ने की इच्छा जताई थी. उसने अपनी प्रेमिका से एक साल का समय मांगा था ताकि वह हथियारों की दुनिया से बाहर निकल सके और एक नई जिंदगी शुरू कर सके.
वह बंदूक और हिंसा से दूर होकर सामान्य इंसान की तरह जीना चाहता था. बताया जाता है कि वह लगातार इस कोशिश में था कि किसी तरह संगठन से बाहर निकलने का रास्ता मिल जाए. लेकिन उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी.
सुरक्षाबलों के अभियान में हुआ था ढेर
इस बीच सुरक्षा बलों ने चाईबासा और खूंटी जिले की सीमा पर बड़ा अभियान चलाया. इसी अभियान के दौरान बुधराम मुंडा सुरक्षाबलों के हत्थे चढ़ गया और मारा गया. उसकी मौत के बाद जब उसके पत्र और प्रेम कहानी की चर्चा सामने आई, तब लोगों को पता चला कि एक खूंखार नक्सली के भीतर भी सामान्य जिंदगी जीने की इच्छा बची हुई थी. वह अपनी प्रेमिका के साथ नई शुरुआत करना चाहता था, लेकिन उससे पहले ही उसकी जिंदगी खत्म हो गई.
बंदूक की दुनिया में भी छिपी रहती हैं इंसानी भावनाएं
बुधराम मुंडा की कहानी सिर्फ एक नक्सली की मौत की कहानी नहीं है. यह उस मानसिक संघर्ष को भी दिखाती है, जिसमें हिंसा के रास्ते पर चलने वाला इंसान भी कभी कभी सामान्य जिंदगी, रिश्तों और प्रेम की ओर लौटना चाहता है.
उसकी अधूरी प्रेम कहानी यह भी बताती है कि जंगलों और बंदूक के साए में रहने वाले लोगों के भीतर भी भावनाएं जिंदा रहती हैं. लेकिन कई बार हालात, रास्ते और समय उन्हें दूसरा मौका नहीं दे पाते.