Jamshedpur News: जमशेदपुर के बागबेड़ा कॉलोनी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत में अपनी पहचान बनाने वाले युवा वैज्ञानिक डॉ निखिल कुमार सिंह को उनकी बड़ी उपलब्धियों के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने सम्मानित किया. बागबेड़ा कॉलोनी स्थित कुंवर सिंह मैदान में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें शॉल देकर सम्मानित किया गया. इस मौके पर उनके माता पिता ओमप्रकाश सिंह को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में मौजूद पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि डॉ निखिल कुमार सिंह ने अपने शोध और मेहनत से पूरे बागबेड़ा क्षेत्र और जमशेदपुर का नाम रोशन किया है.
भारत सरकार की प्रतिष्ठित फेलोशिप और शोध अनुदान से बढ़ा सम्मान
सम्मान समारोह के दौरान पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता ने बताया कि डॉ निखिल कुमार सिंह का चयन हाल ही में भारत सरकार के प्रतिष्ठित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रेरणा संकाय फेलोशिप के लिए हुआ है. इसके अलावा उन्हें अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान की ओर से प्रधानमंत्री प्रारंभिक शोध अनुदान भी प्रदान किया गया है.
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में डॉ निखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में सहायक प्राध्यापक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रेरणा संकाय फेलो के रूप में कार्य कर रहे हैं. उनका शोध कार्य जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि अनुसंधान पर केंद्रित है.
बागबेड़ा से निकलकर स्विट्जरलैंड और जर्मनी तक बनाई पहचान
साधारण पारिवारिक और सामाजिक परिवेश से निकलकर डॉ निखिल कुमार सिंह ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने स्विट्जरलैंड के न्यूशातेल विश्वविद्यालय से जनसंख्या जीनोमिक्स में पीएचडी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने जर्मनी के म्यूनिख तकनीकी विश्वविद्यालय और कील विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल शोध कार्य किया.
उन्होंने गेहूं के रोगजनकों, जीनोमिक विविधता और आनुवंशिक तत्वों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं का नेतृत्व भी किया है. वैज्ञानिक जगत में उनके शोध को काफी सराहा गया है.
जीनोमिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर लिखीं चर्चित पुस्तकें
डॉ निखिल कुमार सिंह अब तक लगभग 10 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने जीनोमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स विषय पर दो पुस्तकें भी लिखी हैं. उनकी चर्चित पुस्तक जीनोम विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जैव सूचना उपकरण छात्रों और शोधार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय रही है. इस पुस्तक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जीनोमिक्स के आधुनिक उपयोग को बेहद सरल और आसान भाषा में समझाया गया है.
विदेश में अवसर मिलने के बाद भी भारत लौटने का लिया फैसला
विदेशों में बेहतर अवसर मिलने के बावजूद डॉ निखिल कुमार सिंह ने भारत लौटकर कृषि जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान को आगे बढ़ाने का फैसला किया. उनका मानना है कि आधुनिक विज्ञान और नई तकनीक का लाभ गांवों और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और सामान्य परिवारों से आने वाले छात्र भी मेहनत, लगन और लगातार सीखने की इच्छा के दम पर वैश्विक विज्ञान जगत में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं.
सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में शामिल हुए स्थानीय लोग
इस सम्मान समारोह में बागबेड़ा के ग्राम प्रधान चुनका मार्डी, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता, उप मुखिया संतोष ठाकुर, मुखिया उमा मुंडा, मायावती टुडू, धनमुनी मार्डी, उपमुखिया धनंजय कुमार, कुमोद यादव, वार्ड सदस्य सीमा पांडे, कुमुद रंजन सिंह, पूजा कुमारी, समाजसेवी भोला झा, दिग्विजय सिंह, अनील मिश्रा, पवन ओझा, राजीव चौधरी, विजय झा, मिथिलेश सिंह, अरविंद पांडेय, अनुरोध पांडेय, गुड्डू ओझा और रिकू शर्मा समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे.
बागबेड़ा के युवाओं के लिए प्रेरणा बने डॉ निखिल कुमार सिंह
डॉ निखिल कुमार सिंह की सफलता अब बागबेड़ा और जमशेदपुर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की उनकी यात्रा यह साबित करती है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर कोई भी युवा दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकता है.