Global Fuel Price Spike: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने रूसी कच्चे तेल पर दी गई अस्थायी छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ गई है। इसका सीधा असर भारत समेत दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत को लगा बड़ा झटका, महंगाई का खतरा
रूस से सस्ते और निर्बाध कच्चे तेल की सप्लाई भारत के लिए राहत बनी हुई थी, लेकिन अब छूट खत्म होने से भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा बना रहा तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
होर्मुज संकट के बाद रूस बना बड़ा सहारा
मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बाद भारत ने रूसी तेल आयात में भारी बढ़ोतरी की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च में भारत ने प्रतिदिन करीब 4.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जिसमें लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रूस का था। इसी दौरान मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई में करीब 61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
यूरोपीय देशों के दबाव में खत्म हुई छूट
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि तेल संकट को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने मार्च 2026 में अस्थायी छूट दी थी, जिसे 16 मई तक बढ़ाया गया। यूरोपीय देशों का आरोप था कि तेल बिक्री से मिलने वाला पैसा रूस के युद्ध फंड को मजबूत कर रहा है। लगातार विरोध के बाद आखिरकार अमेरिका ने शनिवार को यह छूट समाप्त कर दी।
फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत में हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि सीएनजी भी महंगी हुई है। ऐसे में अब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं तो आम लोगों पर महंगाई की नई मार पड़ सकती है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल कीमतों की दिशा पूरी तरह पश्चिम एशिया के हालात और रूसी सप्लाई पर निर्भर करेगी।