Jharkhand News: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के शिक्षा विभाग को लेकर एक फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) को चरणबद्ध तरीके से सहायक आचार्य के रिक्त पदों पर नियुक्त किया जाए. सर्वोच्च न्यायालय ने पारा शिक्षकों को सीधे नियमित (रेगुलराइजेशन) करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, लेकिन उनके लिए आरक्षित 50 प्रतिशत वैधानिक भर्ती तंत्र को कड़ाई से लागू करने का आदेश दिया है.
सहायक आचार्य बनने के लिए जेटेट पास होना अनिवार्य
अदालत के इस आदेश के अनुपालन में फिलहाल एक तकनीकी शर्त आड़े आ रही है. नियमावली के अनुसार, सहायक आचार्य के पद पर नियुक्त होने के लिए पारा शिक्षकों का झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JETET) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है. वर्तमान में राज्य के लगभग 55 हजार पारा शिक्षकों में से केवल 8 हजार शिक्षक ही जेटेट पास हैं और इस पद के योग्य हैं. शेष शिक्षकों के लिए राहत की बात यह है कि झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) द्वारा जेटेट के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं, जिसकी अंतिम तिथि 21 मई निर्धारित की गई है.
दो परीक्षाओं से गुजरना होगा, विशेष परीक्षा की संभावना
सर्वोच्च न्यायालय के इस बड़े फैसले के बाद बड़ी संख्या में पारा शिक्षक आगामी जेटेट परीक्षा के लिए आवेदन कर रहे हैं. हालांकि, नियुक्ति नियमावली के तहत पात्रता परीक्षा पास करने के बाद भी शिक्षकों को सहायक आचार्य बनने के लिए एक और मुख्य परीक्षा से गुजरना होगा. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य सरकार बाकी बचे हुए पारा शिक्षकों के लिए भविष्य में एक विशेष परीक्षा का आयोजन भी कर सकती है.
40 हजार पद रिक्त, पहले चरण में खाली रह गईं सीटें
राज्य में शिक्षकों के खाली पदों का आंकड़ा काफी बड़ा है. सरकार ने सहायक आचार्य के कुल 50 हजार पद सृजित किए थे, जिसमें से पहले चरण में 26,001 पदों पर बहाली प्रक्रिया शुरू की गई थी. हालांकि, इस प्रक्रिया में केवल 10 हजार पदों पर ही नियुक्ति हो सकी और बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं. इस तरह पहले चरण के करीब 16 हजार और दूसरे चरण के 24 हजार पदों को मिलाकर वर्तमान में लगभग 40 हजार पद खाली पड़े हैं, जिनमें पारा शिक्षकों का आरक्षित कोटा भी शामिल है.