Jharkhand Politics: झारखंड में सामने आए कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. उन्होंने इसे राज्य के बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल बताते हुए कहा कि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बिहार के चर्चित चारा घोटाले जैसी स्थिति पैदा कर सकता है.
कई जिलों तक फैल चूका है घोटाले का दायरा
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मामला केवल वित्तीय गड़बड़ी का नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का प्रतीक बनकर सामने आया है. उनके अनुसार शुरुआत में घोटाले का दायरा बोकारो और हजारीबाग तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब यह कई जिलों तक फैल चुका है.
उन्होंने दावा किया कि हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, रामगढ़, देवघर, जमशेदपुर और साहिबगंज समेत कई जिलों के कोषागारों से करीब 130 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की जानकारी सामने आई है.
बड़ी हेराफेरी है, यह एक व्यक्ति के बस की बात नहीं
मरांडी ने कहा कि बोकारो में गिरफ्तार लेखापाल कौशल पांडे को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, लेकिन इतनी बड़ी रकम की हेराफेरी किसी एक व्यक्ति के बूते की बात नहीं हो सकती. उन्होंने उस समय पदस्थापित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक बोकारो में पहले 4.5 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी, जो अब बढ़कर करीब 16 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.
आरोपियों ने अवैध कमाई से रिश्तेदारों के नाम खरीदी संपत्ति
हजारीबाग को लेकर उन्होंने कहा कि वहां अवैध निकासी की राशि 8 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 30 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. इस मामले में सिपाही शंभू कुमार चौधरी और पंकज कुमार उर्फ धीरेंद्र सिंह की भूमिका सामने आने का दावा भी किया गया है. मरांडी ने आरोप लगाया कि अवैध कमाई से रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदी गई.
पत्र में यह भी कहा गया है कि पुलिस विभाग में मृत कर्मियों के आश्रितों के खातों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर अवैध निकासी की गई और रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई.
नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले में JAP-IT और ई-कुबेर प्रणाली की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि तकनीकी स्तर पर हुई कथित गड़बड़ियों और हेराफेरी की गहन जांच जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि जिलों में पुलिस विभाग के वित्तीय खर्च की निगरानी की जिम्मेदारी डीएसपी मुख्यालय और एसपी की होती है, इसलिए उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.
मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आए
मरांडी ने अपने पत्र में राज्य के ऊर्जा विभाग, पर्यटन विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में पहले सामने आए कथित वित्तीय घोटालों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में सामने आया यह ट्रेजरी घोटाला सरकारी धन की संगठित लूट का हिस्सा प्रतीत होता है. अंत में उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए ताकि निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो.