Digital Banking Security System: देश में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों के बीच डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब केवल OTP के भरोसे लेनदेन को सुरक्षित नहीं माना जाएगा. बैंक और फिनटेक कंपनियां मिलकर नई मल्टी लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रही हैं जिसमें ग्राहक की पहचान कई स्तरों पर जांची जाएगी. इस नई व्यवस्था का मकसद ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाना और ग्राहकों के बैंक खातों को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाना है.पिछले कुछ वर्षों में फर्जी KYC मैसेज, नकली कस्टमर केयर कॉल, स्क्रीन शेयरिंग ऐप, मोबाइल कंट्रोल सिस्टम और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ाने के मामले लगातार सामने आए हैं. कई मामलों में ऐसा भी देखा गया कि मोबाइल ग्राहक के पास ही था लेकिन फिर भी खाते से पैसे निकल गए. ऐसे में अब बैंकिंग सेक्टर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि लेनदेन करने वाला व्यक्ति वास्तव में खाताधारक ही है या नहीं.
अब चेहरा, फिंगरप्रिंट और व्यवहार से होगी ग्राहक की पहचान
नई डिजिटल सुरक्षा प्रणाली में ग्राहक की पहचान सिर्फ OTP तक सीमित नहीं रहेगी. इसमें मोबाइल डिवाइस की पहचान, चेहरे की स्कैनिंग, फिंगरप्रिंट, लोकेशन, लेनदेन की आदतें और ग्राहक के व्यवहार जैसी कई जानकारियों का इस्तेमाल किया जाएगा.
यानी अगर किसी ग्राहक का ट्रांजैक्शन पैटर्न अचानक बदलता है या किसी दूसरे मोबाइल से अकाउंट एक्सेस करने की कोशिश होती है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट हो जाएगा. ऐसे मामलों में अतिरिक्त सत्यापन किया जाएगा ताकि फर्जी ट्रांजैक्शन को रोका जा सके.
जून 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई सुरक्षा व्यवस्था
बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर इस नई सुरक्षा व्यवस्था को जून 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी में है. नई प्रणाली के तहत ग्राहक के खाते को एक विशेष मोबाइल डिवाइस से स्थायी रूप से जोड़ा जाएगा. अगर किसी दूसरे डिवाइस से लॉगिन या ट्रांजैक्शन की कोशिश होती है तो अतिरिक्त जांच करनी होगी. इससे चोरी हुए मोबाइल या फर्जी ऐप के जरिए बैंक खाते तक पहुंच बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल बैंकिंग को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद करेगा.
AI रखेगा हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर
नई बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की भूमिका भी काफी अहम होने वाली है. AI ग्राहक के रोजाना लेनदेन के पैटर्न को समझेगा और किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत अलर्ट जारी करेगा. उदाहरण के तौर पर अगर कोई ग्राहक हमेशा एक ही शहर से ट्रांजैक्शन करता है और अचानक किसी दूसरे राज्य से बड़ी रकम ट्रांसफर होने लगे तो सिस्टम उसे संदिग्ध मान सकता है. इसी तरह देर रात लगातार ट्रांजैक्शन होना या छोटे ट्रांजैक्शन वाले अकाउंट से अचानक बड़ी राशि भेजना भी जांच के दायरे में आ सकता है.
ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए बैंकिंग सेक्टर पर बढ़ा दबाव
देश में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ ही साइबर अपराधी भी नए नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. ऐसे में केवल OTP आधारित सुरक्षा को अब कमजोर माना जाने लगा है. बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन ही डिजिटल बैंकिंग की सबसे