Jharkhand: झारखंड हाई कोर्ट से शिव मशीन टूल्स, चेन्नई के प्रतिनिधि हितेश वी. शाह को तगड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की ओर से दायर दोनों महत्वपूर्ण याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हितेश शाह ने निचली अदालत द्वारा अपनी डिस्चार्ज पिटीशन (आरोपमुक्त करने की याचिका) को खारिज किए जाने और उसके खिलाफ आरोप तय (चार्ज फ्रेम) किए जाने की कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि आरोपी को वर्तमान में कोई राहत नहीं दी जा सकती।
मेकॉन के सीनियर मैनेजर पर पद के दुरुपयोग का आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ मेकॉन (MECON) के सीनियर मैनेजर (मेटालर्जिकल विंग) यू.एन. मंडल से जुड़ी है। आरोप है कि मंडल ने अपने पद का अनुचित लाभ उठाते हुए दो निजी कंपनियों शिव मशीन टूल्स, चेन्नई और जेल इंडिया केमिकल, रांची को नियम विरुद्ध तरीके से कार्यादेश (Work Order) जारी किए थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस भ्रष्टाचार को लेकर 30 अक्टूबर 2017 को पहली प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआई द्वारा दर्ज इसी मुकदमे के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मामले को टेकओवर किया और ईसीआईआर (ECIR) दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
सवा करोड़ से अधिक की रिश्वत का मामला
जांच एजेंसियों का दावा है कि मेकॉन के तत्कालीन सीनियर मैनेजर ने इन दोनों कंपनियों को लाभ पहुंचाने और कार्यादेश दिलाने के एवज में करीब 1.65 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत स्वीकार की थी। ईडी की ओर से अदालत में अधिवक्ता अमित कुमार दास और सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं, जिसमें यह बताया गया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। हाई कोर्ट द्वारा याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद अब हितेश शाह के खिलाफ निचली अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया जारी रहेगी, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ना तय माना जा रहा है।