Adityapur: आदित्यपुर नगर निगम की लगातार सख्ती और अभियान के बावजूद शहर में अतिक्रमण की समस्या जस की तस बनी हुई है। निगम की टीम जैसे ही कार्रवाई खत्म कर लौटती है, वैसे ही सड़क किनारे ठेले-खोमचे और अस्थायी दुकानें फिर से लग जाती हैं। खरकई ब्रिज से लेकर गम्हरिया तक सड़क किनारे अवैध कब्जे के कारण ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था आम बात हो गई है।
कार्रवाई खत्म, फिर वही कब्जा
नगर निगम द्वारा खरकई ब्रिज और मुख्य सड़कों पर लगातार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। कई बार सड़क किनारे लगे ठेले और दुकानों को हटाया भी जाता है, लेकिन कार्रवाई का असर कुछ घंटों तक ही सीमित रह जाता है। निगम की गाड़ियां लौटते ही फल विक्रेता और ठेला संचालक फिर उसी स्थान पर कब्जा जमा लेते हैं। इससे साफ है कि प्रशासनिक कार्रवाई का डर अब खत्म होता जा रहा है।
खरकई ब्रिज से गम्हरिया तक सड़कों पर कब्जा
समस्या सिर्फ खरकई ब्रिज तक सीमित नहीं है। आदित्यपुर से गम्हरिया तक कई बड़े प्रतिष्ठानों और इमारतों के सामने सड़क किनारे अवैध ठेले, खोमचे और अस्थायी दुकानें लग चुकी हैं। सुबह और शाम के समय लोग सड़क पर वाहन खड़े कर खरीदारी करते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
रोजगार और व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी
इन ठेले-खोमचों से कई परिवारों का रोजगार जुड़ा हुआ है। हर व्यक्ति के पास बड़ी नौकरी या व्यवसाय का विकल्प नहीं होता। लेकिन रोजगार के नाम पर शहर की यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं को प्रभावित करना भी उचित नहीं माना जा सकता। ऐसे में प्रशासन को दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना होगा।
वेंडिंग जोन बनाना हो सकता है समाधान
स्थायी समाधान के लिए जरूरी है कि नगर निगम शहर में व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करे। अगर तय स्थानों पर दुकानदारों और ठेला संचालकों को जगह मिले तो उनका रोजगार भी सुरक्षित रहेगा और ट्रैफिक व्यवस्था भी सुधरेगी।
हालांकि समस्या के लिए सिर्फ प्रशासन ही जिम्मेदार नहीं है। शहर के लोग भी सड़क किनारे आसानी से खरीदारी करना पसंद करते हैं, ताकि उन्हें वाहन पार्क कर दूर बाजार तक न जाना पड़े। लोगों की यही सुविधा वाली सोच भी अव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।
सिर्फ अभियान तक सीमित दिख रही कार्रवाई
अब नगर निगम की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल अभियान चलाने और अगले दिन अखबारों में तस्वीरें छपवाने तक सीमित रह गई है। कुछ घंटों बाद फिर वही अतिक्रमण लौट आता है और स्थिति पहले जैसी हो जाती है।
जनप्रतिनिधियों के सामने बड़ी चुनौती
आदित्यपुर नगर निगम में मेयर, डिप्टी मेयर और वार्ड पार्षद चुने जाने के बाद भी ट्रैफिक और अतिक्रमण की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। शहर को साफ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगम की नहीं, बल्कि नागरिकों, दुकानदारों और पूरे समाज की भी है। अब जरूरत सिर्फ अभियान चलाने की नहीं, बल्कि स्थायी और प्रभावी समाधान लागू करने की है।