Jamshedpur: जमशेदपुर में साइबर ठगी के पैसे को खपाने का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। साकची पुलिस द्वारा हाल ही में फायरिंग मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों, आरिफ अली और आलमगीर की पूछताछ के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपियों ने बताया कि साइबर ठग ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराते हैं। इन खातों को उपलब्ध कराने वाले लोगों को 1 से 2 प्रतिशत तक का कमीशन दिया जाता है।
इस नेटवर्क में जमशेदपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के कई युवक शामिल हैं। बेरोजगारी और लालच के चलते ये युवा अपने या दूसरों के नाम से बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों को सौंप देते हैं। इन खातों में ज्यादातर गरीब, अनपढ़ या ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के नाम का इस्तेमाल होता है, जिन्हें पैसों का लालच देकर बहलाया जाता है।
पुलिस और बैंक द्वारा साइबर ठगी की ट्रैकिंग करते हुए हर दिन औसतन 15 से 20 बैंक खातों को फ्रीज किया जा रहा है। इनमें से कई मामलों में खाता धारकों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ठग इन खातों से पैसे निकालने के लिए एटीएम, यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि ठगी की अधिकांश राशि मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, नोएडा, पुणे और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों से इन फर्जी खातों में भेजी जा रही है। पुलिस की तकनीकी टीम इन ट्रांजेक्शनों के आईपी एड्रेस और सोर्स को ट्रैक करने में जुटी हुई है।
इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड दानिश नामक युवक बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस के अनुसार, दानिश ही फर्जी खातों की व्यवस्था करता था और देशभर से आए ठगी के पैसे को इन खातों में ट्रांसफर कराता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सकता है। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।