Jharkhand News: झारखंड के वित्त विभाग ने ट्रेजरी संचालन में होने वाली गड़बड़ियों और सेंधमारी को रोकने के लिए व्यापक तकनीकी बदलाव की तैयारी कर ली है. मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया घोटालों से सबक लेते हुए विभाग ने मानवीय हस्तक्षेप कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अपने पूरे ढांचे को हाई-टेक बनाने का निर्णय लिया है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली प्रशासी पदवर्ग समिति ने इस दिशा में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (PMU) के सुदृढ़ीकरण हेतु 77 नए पदों के सृजन को हरी झंडी दे दी है.
पुराने पदों का सरेंडर और विशेषज्ञों की भर्ती
इस मास्टर प्लान के तहत विभाग ने पुराने और कम प्रभावी 37 पदों को सरेंडर करने का फैसला किया है. इनकी जगह अत्याधुनिक तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी, ताकि सरकारी खजाने की निगरानी को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके. समिति की अनुशंसा के अनुसार, 20 पद संविदा के आधार पर भरे जाएंगे, जिनमें प्रोग्रामर और असिस्टेंट प्रोग्रामर जैसे पद शामिल हैं. वहीं, 48 पदों पर बाह्य स्रोत (आउटसोर्सिंग) के माध्यम से सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी.
तकनीकी विशेषज्ञों का विस्तृत जाल
पीएमयू को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर, जूनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर, सॉफ्टवेयर टेस्टर और मोबाइल एप डेवलपर जैसे पदों पर भर्ती की जा रही है. इसके साथ ही डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर, आईटी सिक्योरिटी मैनेजर, आईटी मैनेजर और हेल्प डेस्क मैनेजर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी विशेषज्ञों को तैनात किया जाएगा. संविदा के आधार पर होने वाली नियुक्तियों में 16 प्रोग्रामर और 3 असिस्टेंट प्रोग्रामर के पद मुख्य रूप से शामिल किए गए हैं.
अन्य निदेशालयों का भी होगा तकनीकी विस्तार
खजाने की सुरक्षा का यह चक्र केवल पीएमयू तक सीमित नहीं है, बल्कि पेंशन, लेखा, कोषागार और अंकेक्षण जैसे संबंधित निदेशालयों में भी पदों का सृजन किया गया है. इन विभागों में एमआईएस ऑफिसर, डाटा एनालिस्ट और हेल्प डेस्क मैनेजर जैसे तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी. इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से सिस्टम को फुल-प्रूफ बनाना और वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाना है.