Jharkhand News: बोकारो की 18 वर्षीय लापता युवती के तथाकथित नरकंकाल मामले में एक नया तकनीकी पेंच फंस गया है. शुक्रवार को न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली झारखंड हाईकोर्ट की पीठ में हुई विशेष सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि नामकुम स्थित आर्मी अस्पताल में डीएनए (DNA) सैंपल लेने की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने हस्तक्षेप याचिका (IA) के माध्यम से जानकारी दी कि इस अस्पताल में न तो सैंपल कलेक्शन के लिए आवश्यक विशिष्ट उपकरण मौजूद हैं और न ही प्रशिक्षित विशेषज्ञ.
केंद्र सरकार ने सुझाए चार वैकल्पिक अस्पताल
आर्मी अस्पताल में सुविधा न होने के कारण केंद्र सरकार की ओर से अदालत को चार अन्य संस्थानों के नाम सुझाए गए हैं. इनमें रामगढ़ का सिख मिलिट्री कंटेनमेंट, सीसीएल अस्पताल रांची, एम्स देवघर और कोलकाता का एक अस्पताल शामिल है. हाईकोर्ट ने अब केंद्र सरकार को सोमवार तक यह बताने का निर्देश दिया है कि इन चारों में से किस स्थान पर युवती के माता-पिता का डीएनए सैंपल सबसे सुलभ तरीके से कलेक्ट किया जा सकता है.
कोलकाता की फॉरेंसिक लैब में होगा डीएनए मिलान
यह मामला बोकारो के पिंडराजोड़ा थाने में दर्ज कांड संख्या 147/2025 से जुड़ा है, जहां 31 जुलाई 2025 से एक युवती लापता थी. पुलिस को जो नरकंकाल बरामद हुआ है, उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने पहले ही कोलकाता की फॉरेंसिक लैब में डीएनए जांच और रिम्स (RIMS) में पोस्टमार्टम का आदेश दिया था. प्रार्थी के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता ने अदालत में संदेह जताया है कि बरामद कंकाल उस युवती का नहीं है, जिसके बाद परिजनों के डीएनए मिलान की प्रक्रिया शुरू की गई है.
सोमवार को होगी मामले की अगली सुनवाई
लापता युवती की मां द्वारा दायर "हेवियस कॉर्पस" याचिका पर अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी. केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत तय करेगी कि परिजनों को डीएनए नमूना देने के लिए कहां जाना होगा. फिलहाल, नामकुम आर्मी अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई है, क्योंकि आमतौर पर सेना ऐसे मामलों के लिए स्थानीय सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर रहती है.