Jharkhand News: झारखंड में कथित शराब घोटाले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मामले पर तीखा बयान देते हुए जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
उन्होंने कहा कि यह उन दुर्लभ मामलों में शामिल हो सकता है, जहां जांच करने वाली एजेंसी खुद ही संदेह के घेरे में आ गई है. एसीबी की जांच में बड़े घोटाले की बात सामने आने और कई अहम गिरफ्तारियां होने के बावजूद अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होना कई सवाल पैदा करता है.
मरांडी ने आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि, पूर्व सचिव की गिरफ्तारी और अधिकारियों से पूछताछ के बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं करना संदिग्ध है. उन्होंने इसे कानून व्यवस्था के साथ मजाक बताते हुए सवाल उठाया कि क्या यह देरी प्रक्रिया का हिस्सा है या किसी को बचाने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने कहा कि यदि जांच को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा. इस तरह की देरी से लोगों का भरोसा भी प्रभावित होता है.
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि उत्पाद विभाग से आधी रात में सबूत मिटाने की कोशिश की गई. हालांकि उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सबूत पूरी तरह मिटाना आसान नहीं है और फॉरेंसिक जांच व डिजिटल ट्रेल से सच्चाई सामने आ सकती है.
उन्होंने चेतावनी दी कि जांच एजेंसी की कार्यशैली पर आने वाले समय में बड़ी जांच एजेंसियां और अदालतें भी सवाल उठा सकती हैं. इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर आगे और हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है.