Hazaribagh: हजारीबाग जिले में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई। बताया जा रहा है कि यह घटना उस समय हुई जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पहुंचे थे। पत्रकार मौके पर मौजूद थे और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान माहौल अचानक बिगड़ गया और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे मंत्री, सवाल पर भड़के समर्थक
जानकारी के अनुसार मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। वे एक दिन पहले पौता जंगल से बरामद एक ही परिवार के तीन लोगों के शव के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने और स्थिति का जायजा लेने आए थे। उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा भी दिया, लेकिन जैसे ही वे अस्पताल से बाहर निकलने लगे, पत्रकारों ने चतरा विमान हादसे में पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सवाल पूछ लिया, जिसके बाद हालात अचानक बदल गए।
सवाल पूछना पड़ा भारी, कैमरों में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही पत्रकारों ने सवाल उठाया, मंत्री के कुछ समर्थक आक्रामक हो गए और उन्होंने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि कुछ पत्रकारों के साथ मारपीट तक की नौबत आ गई। यह पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें समर्थकों का उग्र व्यवहार साफ नजर आ रहा है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरी घटना ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस जगह पर यह घटना हुई, वह एक संवेदनशील सार्वजनिक स्थल है, जहां पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए थी, लेकिन इसके बावजूद पत्रकारों के साथ खुलेआम धक्का-मुक्की और मारपीट होना पुलिस की तैयारियों पर सवाल उठाता है। सवाल यह भी है कि क्या मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था और यदि था तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्या पुलिस ने हमलावरों को रोकने की कोशिश की या सिर्फ मूकदर्शक बनी रही? ऐसे हालात में यह जरूरी हो जाता है कि प्रशासन जवाब दे कि आखिर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।