Bihar Politics: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार ग्रहण करने के बाद दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस शिष्टाचार भेंट के दौरान बिहार के विकास और आगामी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने इसे बिहार की प्रगति के लिए एक नई शुरुआत बताया. राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को मंत्रिमंडल विस्तार की अंतिम मुहर के रूप में देखा जा रहा है.
सहयोगियों के बीच विभागों के बंटवारे का गणित
प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले सम्राट चौधरी ने भाजपा मुख्यालय में नितिन नवीन के साथ भी अहम मंत्रणा की. माना जा रहा है कि इस बैठक में कैबिनेट के संख्या बल और सहयोगियों की हिस्सेदारी पर अंतिम सहमति बन गई है. फॉर्मूले के तहत भाजपा कोटे से 17 और जेडीयू से 15 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है. चिराग पासवान की एलजेपी (आर) को दो सीटें, जबकि जीतन राम मांझी की “हम” और आरएलएम को एक-एक मंत्री पद देकर एनडीए के कुनबे को एकजुट रखने की तैयारी है.
खाली कैबिनेट और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान
15 अप्रैल को शपथ लेने के बाद फिलहाल सरकार में मुख्यमंत्री के अलावा केवल दो उपमुख्यमंत्री, विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ही कार्यरत हैं. लगभग खाली पड़ी कैबिनेट की वजह से कई महत्वपूर्ण फाइलें रुकी हुई हैं और प्रशासनिक कामकाज की गति धीमी है. दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद अब उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में नए मंत्रियों की सूची जारी कर दी जाएगी. इससे न केवल शासन में तेजी आएगी, बल्कि सहयोगी दलों के बीच असंतोष की संभावनाओं को भी खत्म किया जा सकेगा.
24 अप्रैल को बहुमत परीक्षण की अग्निपरीक्षा
एनडीए की इस नई सरकार के लिए 24 अप्रैल की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है, जब विधानसभा के विशेष सत्र में सम्राट चौधरी विश्वास मत हासिल करेंगे. आधिकारिक सूचना के अनुसार, सरकार फ्लोर टेस्ट के जरिए अपना बहुमत साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार है. मानसून सत्र से पहले इस एक दिवसीय सत्र का उद्देश्य सरकार को विधिवत मजबूती प्रदान करना है. विश्वास मत हासिल करने के तुरंत बाद नई कैबिनेट अपना कार्यभार संभाल सकती है, जिससे बिहार में एक स्थिर और पूर्णकालिक शासन की शुरुआत होगी.