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  • 2026-03-29

Kharkai Bridge Traffic Violation: खरकई ब्रिज पर मौत का “शॉर्टकट”, चेकिंग से बचने को झाड़ियों और कच्चे रास्तों का सहारा ले रहे लोग

Kharkai Bridge Traffic Violation: जमशेदपुर और आदित्यपुर को जोड़ने वाले व्यस्ततम खरकई ब्रिज पर इन दिनों ट्रैफिक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए जानलेवा “जुगाड़” का खेल चल रहा है. हेलमेट चेकिंग और भारी जुर्माने से बचने के लिए दोपहिया वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर पुल के नीचे के कच्चे रास्तों, झाड़ियों और सुनसान पगडंडियों का इस्तेमाल कर रहे हैं. नियमों को ताक पर रखकर अपनाए जा रहे ये पैंतरे न केवल असुरक्षित हैं, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के लिए भी एक बड़ा सिरदर्द साबित हो रहे हैं.



जुर्माने का डर ज्यादा, अपनी जान की परवाह कम
खरकाई पुल के मुहाने पर जैसे ही पुलिस की लाल बत्ती चमकती है, वैसे ही नियम तोड़ने वालों की कलाबाजियां शुरू हो जाती हैं. ट्रिपल लोडिंग यानी तीन सवारी चलने वाले लोग पकड़े जाने के डर से पुल से ठीक पहले ही एक सवारी को उतार देते हैं. वह सवारी पैदल पुल पार करती है और आगे जाकर दोबारा बाइक पर बैठ जाती है. सवारी उतारने के चक्कर में पुल पर अचानक गाड़ी रोकने से पीछे से आ रही गाड़ियों के टकराने का खतरा हर वक्त बना रहता है. इसके अलावा, चेकिंग से बचने के लिए लोग जिन पथरीले और झाड़ीदार रास्तों से गाड़ियां दौड़ा रहे हैं, वहां गाड़ियों के असंतुलित होकर पलटने, फिसलने या पहिया पंक्चर होने की पूरी आशंका रहती है.



सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत, कैमरे से कटे ऑनलाइन चालान
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और जानकारों का मानना है कि पुलिस को केवल पुल के मुहाने या अंत में खड़े रहने के पुराने ढर्रे को अब बदलना होगा. जिन गुप्त और कच्चे रास्तों का उपयोग लोग भागने के लिए कर रहे हैं, वहां भी औचक निरीक्षण या बैरिकेडिंग की जानी चाहिए. यदि पूरे खरकाई पुल पर हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाएं, तो पुलिस को बीच सड़क पर जान जोखिम में डालकर गाड़ियां रोकने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. सीधे नंबर प्लेट स्कैन कर घर पर ऑनलाइन चालान भेजने से अफरा-तफरी और हादसों पर लगाम लगेगी.

नियम पुलिस के डर से नहीं, परिवार के लिए मानें
आदित्यपुर और जमशेदपुर के बीच रोजाना रोजी-रोटी के लिए हजारों की संख्या में कामगार और आम लोग आवागमन करते हैं. ऐसे में स्थानीय सामाजिक संगठनों और कंपनियों के सहयोग से हेलमेट पहनने और यातायात साक्षरता के लिए छोटे-छोटे कैंप लगाकर लोगों को जागरूक करने की महती आवश्यकता है. यह एक कड़वा सच है कि चालान और जुर्माने की रकम से बचने के लिए अलग-अलग पैंतरे आजमाकर पल भर के लिए बचा जा सकता है, लेकिन सड़क दुर्घटना के वक्त ये जुगाड़ और शॉर्टकट काम नहीं आते. सुरक्षा नियमों का पालन पुलिस के डंडे के डर से नहीं, बल्कि शाम को सकुशल घर लौटने और अपने परिवार की खुशियों के लिए करना बेहद जरूरी है.
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