Ranchi News: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 के अंतर्गत जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की जिला-वार सूची जारी कर दी गई है। इस सूची में राज्य के 24 जिलों में प्रचलित जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किया गया है, जिससे स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ अभ्यर्थियों को उनकी मातृभाषा में अवसर मिल सके। जयराम महतो ने इस मुद्दे को सदन मे जोर शोर से उठाया था।
Ranchi News: संथाली, हो, मुंडारी, कुरुख समेत कई भाषाएं शामिल
जारी सूची के अनुसार, रांची, गुमला, सिमडेगा और खूंटी जैसे जिलों में कुड़ुख (उरांव), मुंडारी, खड़िया और भूमिज जैसी जनजातीय भाषाएं प्रमुख हैं, जबकि नागपुरी, पंचपरगनिया, कुरमाली और बंगला क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में शामिल हैं।
वहीं, पश्चिमी और पूर्वी सिंहभूम जिलों में संथाली, हो, मुंडारी और कुड़ुख जैसी भाषाओं का वर्चस्व है। इन जिलों में क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में कुरमाली, उड़िया और बंगला को भी स्थान दिया गया है।
संथाल परगना क्षेत्र के दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा जिलों में संथाली प्रमुख जनजातीय भाषा है, जबकि क्षेत्रीय भाषाओं में खोरठा और बंगला शामिल हैं।
हजारीबाग, चतरा, बोकारो, धनबाद और गिरिडीह जिलों में संथाली के साथ कुड़ुख (उरांव) और मुंडारी भी कुछ क्षेत्रों में बोली जाती हैं। इन जिलों में नागपुरी, खोरठा, कुरमाली और बंगला क्षेत्रीय भाषाएं हैं।
पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में कुड़ुख (उरांव) प्रमुख जनजातीय भाषा है, जबकि नागपुरी क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल की गई है।
यह सूची राज्य के सभी जिलों में स्थानीय भाषाओं के संरक्षण और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, इससे अभ्यर्थियों को अपनी भाषा में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा और स्थानीय भाषा-आधारित शिक्षा को मजबूती मिलेगी।