Jharkhand News: झारखंड की पंचायतों के विकास के लिए 15वें वित्त आयोग की ओर से एक बड़ी वित्तीय सहायता राशि जारी की गई है. यह उपलब्धि राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह की लगातार कोशिशों और केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय का परिणाम मानी जा रही है. मंत्री ने इस राशि को निर्गत कराने के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित सभी तकनीकी मापदंडों को समय पर पूरा सुनिश्चित किया. बताया जा रहा है कि इस फंड को क्लियर कराने के लिए मंत्री खुद चार से पांच बार दिल्ली गईं और विभाग की ओर से भी लगातार पत्राचार किया गया, जिसके बाद केंद्र ने कुल 687.8 करोड़ रुपये की राशि को हरी झंडी दी.
ग्राम पंचायतों और जिला परिषदों को मिला अनटाइड फंड
वित्तीय वर्ष 2024-25 की दूसरी किस्त के रूप में झारखंड को 275.12 करोड़ रुपये का अनटाइड बेसिक ग्रांट प्राप्त हुआ है. यह राशि राज्य की 4,342 ग्राम पंचायतों, 253 प्रखंड पंचायतों और 24 जिला परिषदों के बीच वितरित की जाएगी. अनटाइड फंड की विशेषता यह है कि स्थानीय निकाय अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर इसका उपयोग कर सकते हैं. इस पैसे से ग्रामीण सड़कों का निर्माण, नालियों की सफाई, सामुदायिक भवनों का रख-रखाव, जल संरक्षण और प्रकाश व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को मजबूत किया जा सकेगा.
पेयजल और स्वच्छता के लिए 412.68 करोड़ का टाइड फंड
केंद्र सरकार ने विकास कार्यों के साथ-साथ विशेष जरूरतों के लिए भी 412.68 करोड़ रुपये का टाइड बेसिक ग्रांट जारी किया है. अनटाइड फंड के विपरीत, टाइड फंड की राशि विशेष कार्यों के लिए आरक्षित होती है. इस राशि का मुख्य हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और गांवों को खुले में शौच मुक्त (ODF) बनाए रखने जैसे कार्यों पर खर्च किया जाएगा. इसमें पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया गया है.
ग्रामीण आधारभूत संरचना और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल
इस भारी-भरकम बजट के मिलने से झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है. मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने इस संबंध में कहा कि राज्य सरकार पंचायतों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 15वें वित्त आयोग से प्राप्त यह अनुदान ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूती प्रदान करने में एक मील का पत्थर साबित होगा. इससे न केवल गांवों की तस्वीर बदलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की संभावना है.
विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी
केंद्र से राशि प्राप्त होने के बाद अब विभाग इसे पंचायतों तक पहुंचाने और योजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी में जुट गया है. इस फंड के माध्यम से उन पुरानी और लंबित योजनाओं को भी पूरा किया जा सकेगा जो बजट के अभाव में रुकी हुई थीं. ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि समय पर राशि मिलने से मानसून से पहले कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पूरे किए जा सकते हैं. पंचायतों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्राम सभा के माध्यम से योजनाओं का चयन करें ताकि पारदर्शिता के साथ विकास कार्य सुनिश्चित किए जा सकें.