Jharkhand: आयकर विभाग ने DMFT से जुड़े कथित घोटाले में लगातार तीन दिनों तक चली छापेमारी की कार्रवाई को देर रात समाप्त किया। इस दौरान 400 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े अहम दस्तावेज और साक्ष्य हाथ लगे हैं। प्रारंभिक जांच में सामग्री आपूर्ति से जुड़ी कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।
15 ठिकानों पर एक साथ दबिश
24 फरवरी की दोपहर बाद विभाग की अलग-अलग टीमों ने एक साथ 15 सप्लायरों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। अधिकारियों को उम्मीद थी कि यहां से आपूर्ति से जुड़े जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड मिलेंगे। हालांकि, जांच के दौरान कई सप्लायरों के पते फर्जी पाए गए। स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर भी संबंधित फर्मों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।
कागजी कंपनियों के जरिये खेल?
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे मामले में कागजी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। शक जताया जा रहा है कि फर्जी पते पर प्रतिष्ठान दिखाकर सामग्री की आपूर्ति का दावा किया गया और भुगतान हासिल किया गया। इसके बाद बैंक खातों से रकम निकालकर आपस में बांट ली गई। फिलहाल इन कथित सप्लायरों की तलाश जारी है, ताकि घोटाले में शामिल प्रभावशाली लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
बाजार भाव से कई गुना अधिक दरों पर आपूर्ति
जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ सामग्रियां बाजार कीमत से 5 से 25 गुना तक अधिक दर पर खरीदी गईं। इतना ही नहीं, रिकॉर्ड में दर्ज कुछ सामान का वास्तविक अस्तित्व तक नहीं मिला। संबंधित सप्लायर भी आपूर्ति की गई सामग्री का पूरा विवरण देने में असमर्थ पाए गए।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
आयकर विभाग अब जब्त दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर हलचल तेज है और आने वाले दिनों में कई प्रभावशाली नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।