National Politics: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy) से जुड़े मामले में अदालत ने सभी 23 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार कर दिया है.
यह फैसला राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) सीबीआई-01 जितेंद्र प्रताप सिंह ने सुनाया. उन्होंने कहा कि मामले में ऐसा कोई प्रथम दृष्टया (prima facie) साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे आपराधिक साजिश या गलत मंशा साबित हो सके.
कौन हैं न्यायाधीश जितेंद्र प्रताप सिंह?
जितेंद्र प्रताप सिंह दिल्ली न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं. वह वर्तमान में नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के रूप में तैनात हैं. इस पद पर वह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांचे गए भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हैं.
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की है और अक्टूबर 2024 में उन्हें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. इससे पहले भी वे कई चर्चित मामलों की सुनवाई कर चुके हैं, जिनमें चुनाव के दौरान दिए गए कथित सांप्रदायिक बयानों से जुड़े मामलों में याचिकाएं खारिज करने जैसे फैसले शामिल हैं.
क्या था पूरा मामला?
सीबीआई ने साल 2022 में इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी. जांच एजेंसी का आरोप था कि नई आबकारी नीति को प्रभावित करने के लिए एक कथित “साउथ लॉबी” द्वारा 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई. इसके बाद एजेंसी ने पूरक चार्जशीट भी दाखिल की.
हालांकि अदालत ने कहा कि जांच में पेश किए गए दस्तावेजों और सबूतों से किसी बड़े आपराधिक षड्यंत्र का संकेत नहीं मिलता. कोर्ट ने साफ किया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं है.
कोर्ट की जांच पर सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने सीबीआई की जांच पद्धति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच ठोस साक्ष्यों के बजाय अनुमान और कहानी पर आधारित लगती है.
अदालत ने खासतौर पर उस गवाह के बयान पर निर्भरता को लेकर चिंता जताई, जो पहले खुद आरोपी था और बाद में सरकारी गवाह (अप्रूवर) बना. न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के बयानों पर अत्यधिक निर्भरता संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ हो सकती है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने चार्जशीट में कई खामियों की ओर इशारा किया और जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश भी की.
फैसले के बाद प्रतिक्रिया
फैसले के तुरंत बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन पर “झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की कोशिश की गई.” उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय से सच्चाई सामने आ गई है. मीडिया से बातचीत के दौरान वह भावुक नजर आए और उनकी आंखों में आंसू भी दिखे.
इस फैसले को सीबीआई के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि केजरीवाल और सिसोदिया के लिए यह महत्वपूर्ण कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है.