Ranchi News: रांची जिले के रातू थाना क्षेत्र अंतर्गत तिगरा गांव में एक मांगलिक कार्यक्रम की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब दो व्यक्तियों के शव गांव के ही एक कुएं से बरामद किए गए. मृतकों की पहचान बेड़ो के जरिया गांव निवासी बंधन भगत (50 वर्ष) और पुनई उरांव (60 वर्ष) के रूप में हुई है. पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, यह मामला एक दुर्घटना जान पड़ता है.
कार्यक्रम के बाद से थे लापता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों व्यक्ति रविवार को तिगरा गांव में आयोजित “लोटा-पानी” की रस्म में शामिल होने आए थे. उत्सव के बाद से ही दोनों अचानक कहीं चले गए और वापस नहीं लौटे. परिजनों ने अपने स्तर पर काफी खोजबीन की, लेकिन दो दिनों तक उनका कोई सुराग नहीं मिला. बुधवार को ग्रामीणों ने गांव के एक कुएं में शवों को तैरते देखा, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.
पुलिस को सूचना दिए बिना शव ले गए ग्रामीण
घटना के बाद एक अजीब स्थिति तब पैदा हो गई जब ग्रामीणों ने पुलिस को सूचित किए बिना ही शवों को कुएं से बाहर निकाल लिया. पहचान होने के बाद मृतक के परिजन और बेड़ो से आए ग्रामीण दोनों शवों को सीधे अपने गांव ले गए. इस दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिससे जांच को लेकर सवाल उठने लगे.
जांच में जुटी पुलिस
मामले की जानकारी मिलने पर रातू थाना पुलिस सक्रिय हुई और थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक टीम बेड़ो के जरिया गांव पहुंची. पुलिस ने दोनों शवों को पुनः अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा. फिलहाल रातू थाने में यूडी (अपमृत्यु) केस दर्ज किया गया है और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दोनों व्यक्ति कुएं तक कैसे पहुंचे.
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सवों के दौरान सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शाती है. बिना पुलिस को सूचना दिए शवों को घटनास्थल से हटाना न केवल साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भविष्य में बीमा या अन्य सरकारी दावों में भी बाधा उत्पन्न कर सकता है. पुलिस का त्वरित एक्शन लेकर शवों को वापस लाना यह सुनिश्चित करता है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम के जरिए स्पष्ट हो सके.