Jharkhand News: झारखंड में बालू की किल्लत को समाप्त करने और निर्माण कार्यों को गति देने के लिए सरकार ने पर्यावरणीय क्लीयरेंस की प्रक्रिया तेज कर दी है. राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित 35 बालू घाटों को खनन के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. इस मंजूरी के बाद संबंधित कंपनियां अब संबंधित जिलों के उपायुक्तों के समक्ष माइनिंग लीज के लिए आवेदन करेंगी. लीज की प्रक्रिया पूरी होते ही इन घाटों से विधिवत बालू उठाव शुरू हो सकेगा.
इन जिलों के घाटों को मिली हरी झंडी
पर्यावरण स्वीकृति पाने वाले घाट मुख्य रूप से दुमका, खूंटी, जामताड़ा, हजारीबाग, रांची, बोकारो, गोड्डा, रामगढ़, लातेहार और जमशेदपुर जिलों में स्थित हैं. स्वीकृत घाटों में हरिपुर, पांडु, अमला चातर, छोटा कामती, आसनचुआं, सोनपुर, पिछरी, श्यामनगर, सिल्ली, और स्वर्णरेखा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं. विभाग का मानना है कि इन घाटों के शुरू होने से बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट आएगी.
नीलामी और नई प्रक्रिया की स्थिति
राज्य में वर्तमान में कुल 444 बालू घाट अधिसूचित हैं. इनमें से 250 से अधिक घाटों की नीलामी प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, जबकि 110 घाटों की नीलामी अब तक लंबित है. खनन विभाग ने शेष बचे घाटों की नीलामी के लिए भी तैयारी शुरू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार, सभी प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही हैं ताकि पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन न हो.
राजस्व वृद्धि और अवैध खनन पर लगाम
खनन विभाग का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी करना और अवैध बालू उठाव पर प्रभावी रोक लगाना है. विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं कंपनियों को खनन की अनुमति दी जा रही है जो पर्यावरणीय शर्तों का पूरी तरह पालन करने का वचन दे रही हैं. आने वाले समय में अन्य घाटों को भी इसी तरह मंजूरी दी जाएगी.
झारखंड में लंबे समय से बालू की किल्लत एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही है. 35 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिलना इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे सरकारी और निजी निर्माण कार्यों को संजीवनी मिलेगी. यदि शेष 110 घाटों की नीलामी और क्लीयरेंस भी समय पर हो जाती है, तो राज्य को अवैध सिंडिकेट से मुक्ति मिल सकती है.