Jamshedpur News: स्वर्णरेखा और खरकाई नदी से हो रहे अवैध बालू उत्खनन को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त (डीसी) कर्ण सत्यार्थी ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए बागुनहातु और बारीडीह जैसे इलाकों में नाव के जरिए हो रहे अवैध खनन को तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया. डीसी ने स्पष्ट किया कि नदियों के अस्तित्व और सरकारी राजस्व से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
बालू स्टॉक यार्डों की होगी डिजिटल निगरानी
अवैध कारोबार और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए डीसी ने सभी बालू डीलरों के स्टॉक यार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाने का अनिवार्य निर्देश दिया है. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि यार्ड में आने और वहां से निकलने वाले बालू का स्रोत वैध है या नहीं. साथ ही, जिला खनन पदाधिकारी को अब तक जब्त किए गए बालू के स्टॉक की अविलंब नीलामी करने और पुल-पुलिया के आसपास से बालू उठाव को पूरी तरह प्रतिबंधित करने को कहा गया है ताकि पुलों की संरचना सुरक्षित रहे.
रेलवे साइडिंग पर प्रदूषण और अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई
बैठक में हल्दीपोखर रेलवे साइडिंग पर खनिज लोडिंग से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा भी गर्माया रहा. प्रदूषण बोर्ड को निर्देश दिया गया कि वे रेलवे को साइडिंग के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाने और खनिज संपदा को ढककर रखने की कार्रवाई सुनिश्चित कराएं. इसके अलावा, गुड़ाबांदा क्षेत्र में बांग्ला ईंट भट्ठा संचालकों को गैर-व्यावसायिक उपयोग के लिए तय 10 हजार ईंट निर्माण की सीमा का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी गई है.
परिवहन नियमों के उल्लंघन पर चलेगा हंटर
डीसी ने बिना पंजीकरण संख्या वाले वाहनों और क्षमता से अधिक माल ढोने वाले ओवरलोडेड ट्रकों की धर-पकड़ के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया. पिछले महीने गठित टास्क फोर्स की कार्रवाई की समीक्षा करते हुए उन्होंने अवैध खनन के परिवहन में लगे वाहनों को जब्त करने को कहा. इस महत्वपूर्ण बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी, ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग और धालभूम एसडीओ अर्णव मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
जमशेदपुर की नदियों से नाव के जरिए बालू निकालना माफियाओं का एक शातिर तरीका रहा है, जिसे रोकना अब प्रशासन के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है. स्टॉक यार्ड में सीसीटीवी लगाना एक “गेम चेंजर” साबित हो सकता है, क्योंकि इससे अवैध स्टॉक को छिपाना मुश्किल होगा. हालांकि, चुनौती इन डिजिटल आदेशों को जमीनी स्तर पर लागू करने की है. यदि प्रशासन पुल-पुलिया के पास हो रहे खनन को रोकने में सफल रहता है, तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे के लिए भी बड़ी जीत होगी.