मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता से मिला वैश्विक मंच
मुलाकात करने वाले स्कॉलर्स में डॉ. रेजिना हांसदा (यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग), डॉ. रिचर्ड टोप्पो (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी), सुश्री माधुरी खलखो (सॉस, यूके), सुश्री रूबी हेंब्रम (लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स) और सुश्री नोलीना मिंज (यूनिवर्सिटी ऑफ़ एसटी. एंड्रूज) शामिल थे। इन छात्रों ने कहा कि मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा परदेशीय छात्रवृत्ति योजना के कारण ही आज आदिवासी और मेधावी छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर झारखंड का नाम रोशन कर रहे हैं।
स्कॉलर्स की मांग और सीएम का आश्वासन
प्रेरणादायक पहल छात्रों ने मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा के दौरान लाभुकों से की गई मुलाकात को ऊर्जा भरने वाला कदम बताया। लक्ष्य 2050, स्कॉलर्स ने उम्मीद जताई कि वर्ष 2050 तक यह योजना झारखंड को रिसर्च और उच्च शिक्षा का वैश्विक केंद्र बना देगी। अनुसंधान पर जोर, छात्रों ने आदिवासी विद्यार्थियों को पीएचडी और रिसर्च के क्षेत्र में विशेष प्रोत्साहन देने की अपील की।
बढ़ेगी लाभुकों की संख्या
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में हर साल 25 छात्रों को इसका लाभ मिल रहा है, जिसे भविष्य में और बढ़ाने की योजना है। मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के बाद आज प्रदेश के आदिवासी छात्र ऑक्सफोर्ड जैसे संस्थानों में पढ़ रहे हैं, यह गर्व की बात है। हमारी सरकार झारखंड के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने सभी स्कॉलर्स को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि उनकी सफलता से राज्य के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।