Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम कलेक्ट्रेट सभागार में उपायुक्त (डीसी) कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक हुई. इस दौरान उपायुक्त ने जिले की यातायात व्यवस्था और बढ़ते सड़क हादसों पर कड़ा रुख अख्तियार किया. बैठक में विशेष रूप से पिछले एक माह के आंकड़ों पर गौर किया गया, जिसमें यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 17 लोग बिना हेलमेट के वाहन चला रहे थे.
लापरवाही बरतने वाले चालकों के लाइसेंस होंगे रद्द
समीक्षा के दौरान पाया गया कि हेलमेट न पहनना, गलत दिशा में वाहन चलाना और तेज रफ्तार ही अधिकांश मौतों की मुख्य वजह रही है. डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जाए, बल्कि गंभीर मामलों में चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस भी तुरंत रद्द किए जाएं. उन्होंने “ड्रिंक एंड ड्राइव” के खिलाफ भी निरंतर अभियान चलाने की बात कही.
फिटनेस और ओवरलोडिंग पर बस मालिकों की तय होगी जिम्मेदारी
यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाने और बीच सड़क पर यात्रियों को उतारने-चढ़ाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए बस मालिकों की जवाबदेही तय की गई है. उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और पुरानी गाड़ियों को सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसके अलावा, उत्पाद विभाग को शराब दुकानों के आसपास अवैध रूप से शराब पिलाने वाले अड्डों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
ब्लैक स्पॉट पर सुधार और पीड़ितों को मुआवजे का आदेश
सड़क हादसों को कम करने के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट और अन्य संभावित दुर्घटना स्थलों पर तत्काल सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश दिए गए. डीसी ने “हिट एंड रन” मामलों के लंबित फाइलों का निपटारा कर पीड़ित परिवारों को जल्द मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने को कहा. साथ ही, घायलों की मदद करने वाले लोगों को “गुड सेमेरिटन” योजना के तहत सम्मानित करने का निर्णय लिया गया ताकि नागरिक जिम्मेदारी को बढ़ावा मिल सके.
जमशेदपुर में सड़क सुरक्षा की यह समीक्षा जिला प्रशासन की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है. 17 मौतों का आंकड़ा यह बताता है कि केवल बुनियादी ढांचे में सुधार काफी नहीं है, बल्कि चालकों के व्यवहार में बदलाव लाना अधिक आवश्यक है. हेलमेट के प्रति लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है. प्रशासन द्वारा लाइसेंस रद्द करने और बस मालिकों पर सीधी कार्रवाई का फैसला एक कड़ा संदेश है कि अब केवल चालान से काम नहीं चलेगा. यदि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन हुआ, तो आने वाले समय में जिले की मृत्यु दर में निश्चित रूप से गिरावट आ सकती है.