Tibet: भारत के पड़ोस में स्थित दुनिया की छत कहे जाने वाले तिब्बत में शुक्रवार तड़के कुदरत का कहर देखने को मिला। जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया था, तभी धरती के भीतर मची हलचल ने हड़कंप मचा दिया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 2:30 बजे तिब्बत में 4.5 तीव्रता के भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए, भूकंप की गहराई 25 किलोमीटर थी.
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, इस भूकंप में अभी किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है. हालांकि, तीव्रता इतनी जरूर थी कि लोग सहम गए. जब लोगों के कंपन महसूस हुई तो वे डर से घरों से बाहर की ओर भागने लगे. बता दें कि तिब्बत में अभी सर्दी का कहर चरम पर है. फरवरी में यहां तापमान माइनस 10 से माइनस 20 डिग्री तक चला जाता है. यह एक तरह का उथला भूकंप था. उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि उनकी लहरें सीधे सतह तक पहुंचती हैं और झटके बहुत तेज महसूस होते हैं.
जब झटके आए तो लोग सो रहे थे. अचानक घर हिलने लगे, बर्तन गिरने लगे, दीवारें कांपने लगीं. कंपकंपाती ठंड में लोग बिना कुछ पहने, बच्चे को गोद में लिए, कंबल ओढ़े बाहर भागे. कई लोगों ने बताया कि वे डर के मारे चीखते-चिल्लाते सड़क पर आ गए. दुनिया की छत कहे जाने वाले तिब्बत के इस इलाके में रात का सन्नाटा भूकंप की गड़गड़ाहट से भर गया.
तिब्बत का पठार भूकंपों का गढ़ है. यहां भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है. इसी टक्कर ने हिमालय को जन्म दिया और आज भी यही टक्कर धरती को हिला रही है. तिब्बत में स्ट्राइक-स्लिप और नॉर्मल फॉल्ट्स बहुत सक्रिय हैं. पिछले सालों में भी यहां 5 से 7 मैग्नीट्यूड के भूकंप आ चुके हैं. 2008 में तो पांच ऐसे भूकंप आए थे जिनकी तीव्रता 5.9 से 7.1 तक थी.
NCS ने कहा कि यह क्षेत्र हमेशा सक्रिय रहता है. प्लेट्स की टक्कर से हिमालय के पहाड़ भी ऊंचे होते जा रहे हैं. ऐसे में छोटे भूकंप भी बड़ी चेतावनी हो सकते हैं. इस भूकंप ने एक बार फिर याद दिला दिया कि दुनिया की छत कितनी नाजुक है. तिब्बत, नेपाल, उत्तर भारत- ये सारे इलाके एक ही फॉल्ट लाइन पर हैं. यहां हर साल दर्जनों भूकंप आते हैं.