Municipal Elections: नगर निकाय चुनावों को लेकर इस बार मतदान व्यवस्था में एक अहम और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। चुनाव आयोग ने वर्षों बाद पुरानी प्रणाली को बहाल करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले से न केवल चुनावी प्रक्रिया का स्वरूप बदला है, बल्कि प्रशासनिक तैयारियों और प्रत्याशियों की जिम्मेदारियां भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।
ईवीएम के अभाव में इस बार मतगणना में अधिक समय लगने की पूरी संभावना है। जहां बीते चुनावों में कुछ ही घंटों के भीतर नतीजे घोषित हो जाते थे, वहीं बैलेट पेपर से होने वाली मतगणना में करीब 72 घंटे या उससे अधिक का समय लग सकता है। अधिकारियों का कहना है कि मतपत्रों की गिनती एक-एक कर किए जाने के कारण प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से लंबी होगी।
2008 जैसी स्थिति की वापसी
बता दें कि वर्ष 2008 में हुए नगर निकाय चुनाव भी बैलेट पेपर से ही कराए गए थे। उस समय मतगणना पूरी होने और अंतिम परिणाम आने में लगभग चार दिन लग गए थे। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ईवीएम को अपनाया गया। 2008 के बाद हुए दो नगर निकाय चुनाव ईवीएम से संपन्न हुए, जिनमें परिणाम अपेक्षाकृत काफी जल्दी सामने आए। वर्ष 2018 के चुनाव में तो छह घंटे के भीतर ही नतीजे आने लगे थे।
मतदाताओं को बरतनी होगी विशेष सावधानी
बैलेट पेपर प्रणाली के तहत मतदाताओं को इस बार खास सतर्कता बरतनी होगी। मतदान के दौरान उन्हें एक ही बैलेट बॉक्स में दो अलग-अलग बैलेट पेपर डालने होंगे। पहला बैलेट पेपर महापौर पद के लिए होगा, जबकि दूसरा वार्ड सदस्य के चुनाव के लिए। यदि मतदाता से किसी भी प्रकार की गलती होती है जैसे गलत तरीके से बैलेट डालना या निशान स्पष्ट न होना तो वोट के रद्द होने की आशंका रहेगी। ऐसे में प्रशासन की ओर से मतदाताओं को सही तरीके से मतदान करने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संपन्न कराना है। बैलेट पेपर प्रणाली की वापसी भले ही समय लेने वाली हो, लेकिन आयोग का दावा है कि हर स्तर पर सावधानी बरतते हुए चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से कराए जाएंगे।