Jharkhand News: सरकारी राशन व्यवस्था में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है. पलामू की आरडीएस एंड सन्स राइस मिल पर पीडीएस के तहत चावल आपूर्ति में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगा है. विभागीय जांच में सामने आया है कि मिल की वास्तविक उत्पादन क्षमता और कागजों में दिखाई जा रही आपूर्ति के बीच भारी अंतर है. अब खाद्य आपूर्ति विभाग ने इस मिल को पीडीएस आपूर्ति सूची से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
तकनीकी रूप से असंभव दिखी आपूर्ति
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि राइस मिल की अधिकृत क्षमता मात्र 12 टन प्रति घंटा है. इसके बावजूद कागजों में यह दर्शाया गया कि मिल एक ही समय में लातेहार, पलामू और गढ़वा तीनों जिलों को 12-12-12 टन प्रति घंटा के हिसाब से कुल 36 टन चावल की आपूर्ति कर रही थी. विभाग ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन और तकनीकी रूप से असंभव करार दिया है.
मजिस्ट्रेटी जांच में हुई पुष्टि
मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य आपूर्ति विभाग ने मजिस्ट्रेटी जांच कराई. जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि क्षमता से कई गुना अधिक आपूर्ति केवल कागजों में दिखाई जा रही थी. एक ही समय में तीन जिलों के लिए उत्पादन दर्शाया जाना पूरे सिस्टम में हेराफेरी की ओर इशारा करता है.
गढ़वा गोदाम से अनाज गायब होने का खुलासा
विभागीय सूत्रों के अनुसार हाल ही में गढ़वा जिले के जेएफएफसी गोदाम से करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य का अनाज गायब पाया गया था. भौतिक सत्यापन में यह भी सामने आया कि गोदाम की वास्तविक भंडारण क्षमता से कहीं अधिक स्टॉक केवल कागजों में दर्ज था. जब मौके पर जांच की गई तो तीन करोड़ रुपये से अधिक के अनाज की भारी कमी पाई गई.
मिल पर पांच साल का प्रतिबंध प्रस्तावित
पूरे मामले को गंभीर मानते हुए खाद्य आपूर्ति विभाग ने आरडीएस एंड सन्स राइस मिल को अगले पांच वर्षों के लिए डी बार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. फिलहाल मिल प्रबंधन से उनका पक्ष मांगा गया है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जवाब मिलने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी.
यह मामला पीडीएस व्यवस्था में गहरे स्तर पर चल रही गड़बड़ियों को उजागर करता है. यदि एक मिल कागजों में तीन गुना अधिक आपूर्ति दिखा सकती है तो यह संकेत है कि निगरानी तंत्र में बड़ी खामियां हैं. समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे घोटाले आम जनता के हिस्से का राशन हड़पते रहेंगे.