जांच अधिकारियों का पत्रकारों से भागना चर्चा का विषय
शाम के समय सदर अस्पताल पहुंची छह सदस्यीय टीम ने सिविल सर्जन डॉ. भारती मिंज और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बंद कमरे में लंबी बैठक की। टीम ने ब्लड बैंक के रिकॉर्ड और संबंधित फाइलों को खंगाला। हालांकि, जब जांच पूरी कर टीम बाहर निकली, तो दृश्य हैरान करने वाला था। पत्रकारों ने जब जांच के निष्कर्षों पर सवाल पूछने की कोशिश की, तो अधिकारी जवाब देने के बजाय मुंह छिपाकर भागते नजर आए। अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर और भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपको बताते है क्या है पूरा मामला
मामला तब प्रकाश में आया जब चाईबासा के एक ही परिवार के तीन सदस्य एचआईवी संक्रमित पाए गए। पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से जो खून उन्हें चढ़ाया गया था, वह पहले से संक्रमित था। यह लापरवाही सीधे तौर पर तीन जिंदगियों के साथ खिलवाड़ है। इससे पहले भी चाईबासा ब्लड बैंक सुरक्षा मानकों को लेकर विवादों में रहा है।
प्रशासन का पक्ष
इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी देने से बच रहा है। चाईबासा की सिविल सर्जन डॉ. भारती मिंज ने केवल इतना कहा कि "मामले की जांच चल रही है और रांची से आई टीम तथ्यों का आकलन कर रही है। अगर ब्लड बैंक द्वारा संक्रमित खून चढ़ाने की बात सच साबित होती है, तो यह स्वास्थ्य विभाग की एक अक्षम्य चूक होगी। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों की जान इतनी सस्ती है।