Jharkhand News: रांची में प्रवर्तन निदेशालय और झारखंड पुलिस के बीच चल रहे टकराव के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है. शुक्रवार को ED की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आदेश दिया कि ED के अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले को केंद्रीय एजेंसी के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.
ED अधिकारियों को मिली सुरक्षा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन ED अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है जिनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस के आरोपी संतोष कुमार ने नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब ED अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था में BSF को तैनात किया जाएगा ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.
याचिका के जरिए पहुंचा मामला अदालत तक
गौरतलब है कि रांची पुलिस द्वारा गुरुवार को ED कार्यालय में की गई छापेमारी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में ED ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी. इसी याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और यह अंतरिम आदेश पारित किया गया.
एफआईआर से शुरू हुआ पूरा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत पीएचईडी के कर्मचारी संतोष कुमार की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर से हुई. संतोष ने आरोप लगाया था कि रांची स्थित ED कार्यालय में पूछताछ के दौरान उसके साथ मारपीट की गई और अधिकारियों ने दुर्व्यवहार व प्रताड़ना की. इन आरोपों के आधार पर एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज किया गया था.
ED दफ्तर पहुंची थी पुलिस टीम
एफआईआर दर्ज होने के बाद गुरुवार की सुबह रांची पुलिस की एक टीम हिनू स्थित ED कार्यालय पहुंची थी. वहां कई घंटों तक जांच की गई और घटना के समय मौजूद अधिकारियों से पूछताछ की गई. इसी कार्रवाई के बाद मामला और गंभीर हो गया और ED ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में दखल बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया.
अंतरिम आदेश फिलहाल स्थिति को शांत करने वाला
ED और राज्य पुलिस के बीच यह टकराव केवल एक प्राथमिकी तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के अधिकारों की सीमा का सवाल बन गया है. हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश फिलहाल स्थिति को शांत करने वाला है लेकिन आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि जांच की दिशा क्या होगी और किस एजेंसी का अधिकार क्षेत्र प्रभावी माना जाएगा. यह मामला आने वाले समय में केंद्र और राज्य संबंधों की कसौटी भी बन सकता है.