Delhi: भारत में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि दिसंबर 2026 तक देश के सभी नए वाहनों में व्हीकल-टू-व्हीकल V2V कम्युनिकेशन तकनीक को अनिवार्य कर दिया जाएगा।
क्या है V2V तकनीक और कैसे करेगी काम
V2V एक वायरलेस संचार प्रणाली है जिसके तहत सड़क पर चल रहे वाहन एक-दूसरे से बात कर सकेंगे।रियल-टाइम डेटा शेयरिंग, वाहन अपनी लोकेशन, गति, दिशा और अचानक ब्रेक लगने जैसी जानकारी आपस में साझा करेंगे। ऑन-बोर्ड यूनिट, हर गाड़ी में एक विशेष चिप या सेंसर लगाया जाएगा। यदि सामने वाला वाहन अचानक रुकता है या मोड पर कोई खतरा है, तो यह सिस्टम चालक को तुरंत अलर्ट भेज देगा।
टक्कर से बचाव
अंधेरे मोड़ या कोहरे जैसी स्थिति में, जहाँ चालक को सामने वाली गाड़ी नहीं दिखती, वहाँ यह तकनीक संभावित टक्कर को रोकने में जीवनरक्षक साबित होगी।
कीमत और सरकार का लक्ष्य
इस तकनीक के शामिल होने से वाहनों की निर्माण लागत में मामूली वृद्धि होगी। अनुमान के मुताबिक, नई गाड़ियों की कीमत 5,000 से 7,000 रुपये तक बढ़ सकती है। हालांकि, सरकार का मानना है कि सुरक्षा के लिहाज से यह कीमत बहुत कम है।
नितिन गडकरी ने कहा कि हमारा लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या को 50% तक कम करना है। यह तकनीक भारतीय सड़कों को स्मार्ट और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
परिवहन मंत्रियों की बैठक में बनी सहमति
यह निर्णय 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। सरकार जल्द ही इसके लिए आवश्यक गाइडलाइन्स और मानकों का मसौदा पेश करेगी ताकि ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी उत्पादन लाइनों को इसके अनुरूप तैयार कर सकें।