Jharkhand News: झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू हो सकती है. भारत निर्वाचन आयोग ने इसे लेकर 8 जनवरी को दिल्ली में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में SIR से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी. अगले चरण में जिन राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू होनी है, उनमें झारखंड का नाम भी शामिल हो सकता है.
सत्यापन के समय बीएलओ घर पर पहुंचकर मान्य दस्तावेजों की करेंगे जांच
ऐसे में मतदाताओं के लिए यह जानना जरूरी हो गया है कि SIR के दौरान किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी. निर्वाचन आयोग की ओर से साफ किया गया है कि सत्यापन के समय बीएलओ घर पर पहुंचकर मान्य दस्तावेजों की जांच करेंगे. जिनके पास तय सूची में शामिल कोई एक दस्तावेज भी होगा, उनका सत्यापन आसानी से हो सकेगा. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने बताया कि 2003 में जिन मतदाताओं का नाम झारखंड के बाहर की मतदाता सूची में था, उनका रिकॉर्ड चुनाव आयोग की वेबसाइट और सीओ कार्यालय में उपलब्ध है. ऐसे मतदाता SIR के दौरान बीएलओ के समक्ष फिजिकल मैपिंग भी कर सकते हैं. भारत के किसी भी राज्य की वोटर लिस्ट को वेबसाइट से डाउनलोड कर सत्यापन में जोड़ा जा सकता है.
SIR के लिए मान्य दस्तावेज
- केंद्र सरकार, राज्य सरकार या पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी का पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश.
- 01.07.1987 से पहले भारत में सरकारी, स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी पहचान पत्र या प्रमाण पत्र.
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र
- मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिक या अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र
- सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी, एससी, एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र.
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर जहां यह उपलब्ध है.
- राज्य या स्थानीय निकाय द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर.
- सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र.
- आधार से संबंधित वही निर्देश लागू होंगे जो आयोग के पत्र संख्या 23/2025 ईआरएस/वोलिल दिनांक 09.09.2025 के तहत जारी किए गए हैं.
- जिनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में झारखंड के बाहर किसी अन्य राज्य में दर्ज है, वे उस वोटर लिस्ट की क्रम संख्या, विधानसभा और जिला दर्शाने वाली फोटो कॉपी दे सकते हैं.
- पैरेंटल मैपिंग से बाहर के मतदाताओं के बच्चे जो नए वोटर बनने वाले हैं, उन्हें शपथ पत्र के साथ पैरेंटल मैपिंग से जुड़े दस्तावेज देने होंगे.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि जिनका नाम 2025 के इलेक्टोरल रोल में दर्ज नहीं है, उन्हें इनोमेरेशन फॉर्म नहीं मिलेगा. ऐसे लोग दावा या आपत्ति की अवधि में फॉर्म 6 भर सकते हैं. फॉर्म 6 के साथ दस्तावेज और शपथ पत्र देने पर माता पिता के साथ मैपिंग की जाएगी.
नए वोटर के लिए अलग प्रक्रिया
जो लोग पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाना चाहते हैं, उन्हें अपना और अपने माता या पिता का दस्तावेज देना होगा. इसके साथ शपथ पत्र भी जरूरी होगा. झारखंड के बाहर से आकर यहां वोटर बनने वालों पर भी यही नियम लागू होगा. के रवि कुमार के अनुसार जिनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है, वे अपने माता पिता या दादा दादी का 2003 के SIR में शामिल रोल को भी संलग्न कर सकते हैं.
मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने पर जोर
SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की तैयारी यह संकेत देती है कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने पर जोर है. समय रहते दस्तावेज तैयार रखने से आम मतदाताओं को परेशानी से बचाया जा सकता है. झारखंड में यह प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है.