Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-01-26

Republic Day 2026: गुलामी से गणराज्य तक, 26 जनवरी ने रची नए भारत की कहानी

Republic Day 2026: 26 जनवरी 1950 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब आजादी के बाद भारत ने केवल शासन व्यवस्था ही नहीं बदली, बल्कि अपने भविष्य की दिशा भी तय की। इसी दिन भारत ने स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। यह तारीख सिर्फ एक संवैधानिक बदलाव नहीं थी, बल्कि उस संघर्ष, त्याग और उम्मीदों का परिणाम थी, जिसके लिए पीढ़ियों ने बलिदान दिए थे।

इस दिन भारतीय संविधान लागू हुआ और भारत ने औपचारिक रूप से लोकतंत्र के रास्ते पर कदम रखा। यह पल हर भारतीय के लिए गर्व, आत्मसम्मान और नए विश्वास से भरा हुआ था।

संविधान के साथ शुरू हुआ नए भारत का सफर
26 जनवरी 1950 की सुबह देश ने एक ऐतिहासिक दृश्य देखा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। इसके साथ ही ब्रिटिश शासन के दौरान लागू भारत सरकार अधिनियम 1935 को पीछे छोड़ते हुए भारतीय संविधान ने देश की बागडोर संभाली।

यह संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों की अभिव्यक्ति था। इसने हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और सम्मान का अधिकार दिया। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर एक राष्ट्र बनने की मजबूत नींव इसी दिन रखी गई।

मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में पहली ऐतिहासिक परेड
भारत का पहला गणतंत्र दिवस समारोह नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित किया गया। आज की भव्यता से अलग, उस समय आयोजन में सादगी थी, लेकिन उत्साह और गर्व की कोई कमी नहीं थी।

थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लगभग 3000 जवानों ने अनुशासन और गर्व के साथ परेड में भाग लिया। कदमताल की हर आवाज़ यह बता रही थी कि भारत अब अपने पैरों पर खड़ा हो चुका है। करीब 15 हजार दर्शक उस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने, जिनकी आंखों में भविष्य को लेकर उम्मीद साफ झलक रही थी।

31 तोपों की सलामी: गणराज्य की घोषणा
पहले गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 31 तोपों की सलामी दी गई। तोपों की गूंज सिर्फ सम्मान नहीं थी, बल्कि यह ऐलान था कि भारत अब किसी के अधीन नहीं, बल्कि अपने निर्णय खुद लेने वाला गणराज्य है। हर धमाके के साथ भारत की संप्रभुता, आत्मनिर्भरता और लोकतांत्रिक पहचान और मजबूत होती गई।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नई पहचान
भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं थी, बल्कि आजादी के बाद भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पहली मजबूत झलक थी।

इससे यह संदेश गया कि भारत न केवल अपने भीतर लोकतंत्र को मजबूत कर रहा है, बल्कि एशियाई देशों और दुनिया के साथ मित्रता और सहयोग का रास्ता भी अपना रहा है।

विभाजन की पीड़ा के बीच एकता का संकल्प
पहला गणतंत्र दिवस ऐसे समय में मनाया गया, जब देश अभी भी विभाजन के दर्द से जूझ रहा था। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए थे, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ सामने थीं।

इन सबके बावजूद गणतंत्र दिवस का आयोजन यह साबित करता है कि भारत ने टूटने के बजाय एकजुट होने का रास्ता चुना। यह दिन लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक बन गया।

1950 की भावना आज भी ज़िंदा है
आज गणतंत्र दिवस कर्तव्य पथ पर अत्याधुनिक हथियारों, रंग-बिरंगी झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ मनाया जाता है। लेकिन 1950 के पहले गणतंत्र दिवस की सादगी, प्रतिबद्धता और राष्ट्रनिर्माण की भावना आज भी उतनी ही प्रेरणादायक है।

पहला गणतंत्र दिवस केवल एक सरकारी समारोह नहीं था, बल्कि उस भारत की नींव था, जो संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर गर्व करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है और यही 26 जनवरी 1950 की सबसे बड़ी विरासत है। 
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !