Ranchi News : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उसे दबाने और जांच की रफ्तार धीमी करने में लगी हुई है।
प्रतुल शाहदेव ने दावा किया कि ट्रेजरी घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और इसकी राशि 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि अप्रैल महीने में सामने आए इस मामले के तार अब राज्य के कई जिलों से जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ गई है।
वित्त मंत्री के बयान का हवाला देकर भाजपा ने बढ़ाए सवाल
उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर चुके हैं कि बड़ी राशि का स्पष्ट हिसाब नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
भाजपा प्रवक्ता ने सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जांच टीम में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनका कार्यकाल कथित घोटाले की अवधि से जुड़ा रहा है। इससे जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न होता है।
एसआईटी की निष्पक्षता और दस्तावेजों की उपलब्धता पर उठे प्रश्न
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विशेष ऑडिट कराने की घोषणा तो की, लेकिन जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए। दस्तावेजों की कमी के कारण जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और सच्चाई सामने आने में देरी हो रही है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कथित घोटाले से जुड़े कई जिलों में अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बिहार के चर्चित चारा घोटाला का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में देरी और तथ्यों को छिपाने का प्रयास किसी भी सरकार के लिए गंभीर परिणाम लेकर आ सकता है। उन्होंने राज्य सरकार को अतीत से सबक लेने की सलाह दी।
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों को दबाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि जांच से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराने में सक्षम नहीं है, तो मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंप दिया जाना चाहिए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे प्रकरण में पारदर्शिता बरतने की मांग भी की।