Jharkhand News: झारखंड के पांच जिलों यानी कोडरमा, पाकुड़, साहिबगंज, पलामू और रांची में चल रही ग्रामीण पाइप जलापूर्ति परियोजनाओं में सेंट्रल नोडल ऑफिसर (CNO) की जांच में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं. कुल 2338 करोड़ रुपये की लागत वाली इन पांच परियोजनाओं में न केवल निर्माण कार्य में घटिया गुणवत्ता पाई गई, बल्कि प्रक्रियात्मक स्तर पर भी भारी लापरवाही बरती गई है. जांच टीम ने विशेष रूप से कोडरमा में ओवरहेड टैंक (OHT) के गिरने और पलामू में जल स्रोत की अनिश्चितता जैसे गंभीर मुद्दों को रेखांकित किया है, जिससे विभाग की कार्यशैली कटघरे में है.
मुख्य सचिव की बैठक में उठा मुद्दा, केंद्र को भेजी जाएगी अपडेट रिपोर्ट
इन परियोजनाओं में पाई गई खामियों की गूंज बीते दिनों मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई अपेक्स कमेटी की बैठक में भी सुनाई दी. कमेटी ने इन खामियों पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार को एक विस्तृत अपडेट रिपोर्ट भेजने की सिफारिश की है, ताकि अटकी हुई योजनाओं में सुधार कर उन्हें गति दी जा सके. साहिबगंज-गोड्डा-दुमका मेगा प्रोजेक्ट में भूमि विवाद और रेलवे क्रॉसिंग जैसे कारणों से काम काफी पिछड़ गया है. हालांकि, अब कुछ तकनीकी डिजाइनों को मंजूरी मिल गई है और रेलवे से एनओसी भी प्राप्त हो गई है.
करोड़ों की लागत कम करने की संभावना, सुस्त रफ्तार से बढ़ रहा काम
सेंट्रल नोडल ऑफिसर की टीम ने अपनी रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा किया है कि इन परियोजनाओं की लागत में करीब 59.32 करोड़ रुपये तक की कटौती की जा सकती थी. वर्तमान स्थिति की बात करें तो एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) के अनुसार, कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भौतिक प्रगति मात्र 38% और वित्तीय प्रगति केवल 20% ही दर्ज की गई है. फिलहाल विभाग स्वीकृत डीपीआर के अनुसार कार्य निष्पादन का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर देरी और तकनीकी खामियां अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.