Jharkhand News: झारखण्ड विधानसभा में जमीन के म्यूटेशन और भू राजस्व व्यवस्था में भ्रस्टाचार के मामले ने बहस का रूप ले लिया और सवाल - जवाब का सिलसिला शुर हो गया। विधायक राजेश कच्छप ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि साल 2000 में जिसने जमीन खरीदी थी उनका भी म्युटेशन अभी तक नहीं हो पाया है, इस मामले में सरकार क्या कदम उठा रही है। इसके जवाब में मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि वर्त्तमान में रजिस्ट्री के बाद जमीन का विवरण ऑटो जनरेटेड प्रक्रिया से अंचल कार्यालय पहुँच जाता है जहाँ म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। जो लोग भी म्यूटेशन नहीं करा पाएं है वे एलआरडीसी (LRDC) में आवेदार करें, जांच के बाद उनके मामले का निवारण किया जायेगा।
रसीद कटवाने के लिए मांगे जाते हैं पैसे
राजेश कच्छप ने आगे बताया कि अंचल कार्यालय में समस्या का समाधान नहीं होता, साथ ही बाबूलाल मरांडी ने भू-राजस्व व्यस्था की आलोचना करते हुए कहा कि, लोगों से जमीन की रसीद कटवाने के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं, उन्होंने अपने इलाके के एक व्यक्ति का उदाहरण देते हुए बताया कि उससे जमीन की रसीद कटवाने के लिए 50 हजार रूपए की मांग की गई।
नविन जायसवाल ने कहा कि वर्ष 2015-16 तक मेनुअल रसीद काटी जाती थी, भू-राजस्व विभाग को पंचायत स्तर कैंप लगा कर जमीनों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। सदन में उपस्थित सदस्यों ने अंचल अधिकारीयों की कार्यप्रणाली और राजस्व व्यवस्था पर कई सवाल उठाए वहीं विधायक अमित यादव ने बताया कि 11 मार्च 2011 को सोम मुंडा के नाम से दखल-दिहानी का आदेश पारित हो चूका था मगर उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
दीपक बिरुआ ने बताया कि मामले की दोबारा सुनवाई कर समस्या का हल कर दिया जायेगा वहीं विधायक का सवाल यही था कि जब आदेश पहले से पारित था तो सुनवाई तत्काल क्यों नहीं हुई।