Parenting Tips: हर माता-पिता चाहते है कि उनका बच्चा अच्छे संस्कारों के साथ बड़ा हो और सही रास्ते पर आगे बढ़े. लेकिन आज के दौर में बच्चों के आसपास का माहौल तेजी से बदल रहा है. स्कूल, सोशल मीडिया और दोस्तों का प्रभाव कई बार बच्चों की सोच और आदतों को प्रभावित कर देता है.
कभी-कभी बच्चे अनजाने में ऐसे दोस्तों के संपर्क में आ जाते है जिनकी आदतें या व्यवहार ठीक नहीं होता. धीरे-धीरे इसका असर बच्चे की पढ़ाई, व्यवहार और सोच पर भी दिखने लगता है. ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों पर नजर रखें और उन्हें सही दिशा में गाइड करें. कुछ आसान आदतें अपनाकर बच्चों को गलत संगत से दूर रखा जा सकता है.
बच्चों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाएं
अगर माता-पिता और बच्चे के बीच भरोसा मजबूत होता है तो बच्चा अपनी हर बात खुलकर बताता है. इसलिए जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों से दोस्त की तरह बात करें और उनकी बात ध्यान से सुनें.जब बच्चा घर में सहज महसूस करता है तो वह अपने दोस्तों और दिनभर की गतिविधियों के बारे में भी खुलकर बात करता है.
बच्चों के दोस्तों को जानना भी जरूरी
पेरेंट्स को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि बच्चा किन दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताता है. उनके दोस्तों से मिलना और उनके परिवार के बारे में थोड़ा जानना भी मददगार होता है.इससे माता-पिता को यह समझने में आसानी होती है कि बच्चे की संगत कैसी है.
सही-गलत की समझ बचपन से दे
बच्चों को छोटी उम्र से ही यह सिखाना जरूरी है कि कौन-सी आदतें अच्छी है और कौन-सी गलत. अगर बच्चे को सही-गलत का फर्क समझ में आता है तो वह खुद ही गलत संगत से दूरी बनाने की कोशिश करता है.संस्कार और सही मार्गदर्शन बच्चे के व्यक्तित्व को मजबूत बनाते है.
बच्चे के समय और गतिविधियों पर ध्यान रखें
माता-पिता को यह देखना चाहिए कि बच्चा अपना समय किन कामों में लगा रहा है. मोबाइल का इस्तेमाल कितना करता है, किस तरह के वीडियो देखता है और किसके साथ समय बिताता है.बच्चों को खेल, पढ़ाई या किसी हॉबी में व्यस्त रखना भी जरूरी है. इससे उनका ध्यान सकारात्मक चीजों में लगता है.
जरूरत पड़े तो प्यार से समझाएं
अगर कभी लगे कि बच्चा गलत दोस्तों के प्रभाव में आ रहा है तो उसे डांटने के बजाय शांत तरीके से समझाना चाहिए.प्यार से समझाने पर बच्चे बात को बेहतर तरीके से समझते है और सही रास्ता चुनने की कोशिश करते है.
बच्चों को सही दिशा देना केवल नियम बनाने से नहीं होता, बल्कि उनके साथ मजबूत रिश्ता बनाने से होता है. जब बच्चे को यह भरोसा होता है कि उसके माता-पिता हमेशा उसके साथ है, तब वह गलत संगत से दूर रहने की कोशिश करता है.