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  • 2026-02-14

Jharkhand News: मलेशिया में हुई गिरिडीह के प्रवासी मजदूर की मौत, गांव में पसरा मातम

Jharkhand: गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र स्थित अडवारा पंचायत के एक प्रवासी मजदूर की मलेशिया में काम के दौरान असामयिक मौत हो गई। इस खबर के गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक की पहचान 36 वर्षीय वकील सिंह के रूप में हुई है, जो पिछले दो वर्षों से मलेशिया में रोजगार कर रहे थे।

परिजनों को गुरुवार देर शाम फोन के माध्यम से उनकी मौत की सूचना मिली। अचानक आई इस खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में कोहराम मच गया और आसपास के लोग ढांढस बंधाने के लिए पहुंचने लगे।

नामी कंपनी में कार्यरत थे, मौत के कारण पर अब भी संशय
बताया जा रहा है कि वकील सिंह मलेशिया में Larsen & Toubro Limited कंपनी में कार्यरत थे। वे बेहतर आमदनी की उम्मीद में विदेश गए थे ताकि अपने परिवार का भविष्य संवार सकें। हालांकि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका स्पष्ट कारण अब तक सामने नहीं आ सका है। परिजन कंपनी और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

पीछे छोड़ गए भरा-पूरा परिवार
वकील सिंह अपने पीछे पत्नी मुन्नी देवी और चार बच्चों को छोड़ गए हैं रूपा कुमारी (20), सुजीत (18), काजल कुमारी (17) और नीतू कुमारी (13)। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं पर थी। उनकी असामयिक मौत से परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। गांव के लोग भी परिवार की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
समाजसेवी और प्रवासी मजदूरों के हितों के लिए काम करने वाले सिकन्दर अली ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जैसे जिलों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में विदेश जाते हैं। लेकिन काम के दौरान दुर्घटनाओं और असामयिक मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो चिंता का विषय है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के स्थायी और सुरक्षित अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि युवाओं को मजबूरी में विदेश का रुख न करना पड़े। उनका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक रोजगार मिलेगा तो ऐसी दुखद घटनाओं से काफी हद तक बचा जा सकेगा।

फिलहाल पूरा गांव वकील सिंह की पार्थिव देह के भारत लाए जाने का इंतजार कर रहा है, ताकि अंतिम संस्कार गांव में किया जा सके। परिवार और ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और कंपनी की ओर टिकी हैं।
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