Pulwama: आज 14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले की 7वीं बरसी के अवसर पर, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा स्थित लेथपोरा में स्थित 185वीं बटालियन सीआरपीएफ के शहीद स्मारक पर एक विशेष श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। समारोह की शुरुआत सीआरपीएफ के महानिदेशक द्वारा पुष्पचक्र अर्पित करने के साथ हुई। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य अर्धसैनिक बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शहीदों को पुष्प अर्पित किए।
गार्ड ऑफ ऑनर की टुकड़ी ने हथियारों को उल्टा कर शहीदों को सलामी दी। हवा में गूंजती मातमी धुन और शहीदों के सम्मान में रखा गया दो मिनट का मौन वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।
शहीदों की याद में सेवा कार्य
शौर्य और बलिदान को याद करते हुए केवल औपचारिक समारोह ही नहीं, बल्कि सेवा के कार्य भी किए गए। लेथपोरा कैंप में सीआरपीएफ द्वारा एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जवानों और स्थानीय युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिकारियों ने बताया कि "यह रक्त उन लोगों की जान बचाने के काम आएगा जिनकी रक्षा के लिए हमारे भाइयों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
प्रधानमंत्री और नेताओं का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश के वीर सपूतों को याद करते हुए लिखा 2019 में आज ही के दिन पुलवामा में शहीद हुए वीर नायकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। उनकी निष्ठा, संकल्प और राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा हर भारतीय के मन में सदैव जीवित रहेगी। देश उनके सर्वोच्च बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी शहीदों के परिवारों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कभी पीछे नहीं हटेगा और शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
परिवारों का गौरव और गम
देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले शहीद जवानों के परिवारों ने भी अपने वीर सपूतों को याद किया। पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में शहीद स्मारकों पर उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि समय बीतने के बाद भी घाव भरे नहीं हैं और सम्मान कम नहीं हुआ है। शहीदों के परिजनों ने गर्व के साथ कहा कि उनके बेटों ने तिरंगे की आन के लिए जान दी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
आपको बताते है वो काला दिन के बारे में
उल्लेखनीय है कि 14 फरवरी 2019 को जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले से विस्फोटक भरी गाड़ी टकरा दी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। भारत ने इस हमले का कड़ा जवाब देते हुए कुछ ही दिनों बाद बालाकोट में हवाई हमले कर आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था।