Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम के छोटा बांकी गांव की रहने वाली 21 वर्षीय युवती बिरहोर ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और हौसले से एक नई पहचान बनाई है। बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार से आने वाली बालिका के माता-पिता जंगल आधारित काम और स्थानीय बाजार में चावल की हांड़ी बेचकर गुजर-बसर करते हैं।
शिक्षा में मिला संस्थागत सहयोग
युवती ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई गांव के हिंदी माध्यम स्कूल से शुरू की, लेकिन टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से उसे चक्रधरपुर के कार्मेल स्कूल में दाखिला मिला। यहां से उसने 2020 में 82 प्रतिशत अंकों के साथ मैट्रिक पास किया। इसके बाद उसने लुपुंगुटू स्थित सेंट जेवियर्स इंटर कॉलेज से विज्ञान विषय में 63 प्रतिशत अंक के साथ इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।
"आकांक्षा" प्रोजेक्ट से मिला दिशा
इंटर के बाद आगे की पढ़ाई को लेकर परिवार में असमंजस था, लेकिन टाटा स्टील फाउंडेशन के "आकांक्षा" प्रोजेक्ट के तहत उसे मार्गदर्शन मिला। इस पहल के तहत न केवल उसकी काउंसलिंग की गई, बल्कि उसके परिवार को भी उच्च शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया गया, जिससे उन्हें आगे पढ़ाई के लिए सहमति मिली।
"समृद्धि" योजना से मिला करियर का मौका
इसके बाद ‘समृद्धि’ प्रोजेक्ट के माध्यम से युवती को नर्सिंग क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला। उसने बेंगलुरु के नारायणा हृदयालय कॉलेज ऑफ नर्सिंग में जीएनएम (GNM) कोर्स में प्रवेश लिया और सफलतापूर्वक अपनी ट्रेनिंग पूरी की।
बेंगलुरु में नौकरी, अप्रैल से ज्वाइनिंग
अब युवती को बेंगलुरु स्थित नारायणा हृदयालय अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर नौकरी मिली है, जहां वह अप्रैल 2026 से कार्यभार संभालेंगी। इस नौकरी के साथ उन्हें सालाना लगभग 3 लाख रुपये का पैकेज मिलेगा।
समाज के लिए भी कर रही काम
शहर में रहने के बावजूद युवती अपने गांव से जुड़ी हुई हैं। वह गांव की महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही हैं। साथ ही भविष्य में गांव में पानी की समस्या को दूर करने के लिए हैंडपंप लगाने की योजना भी रखती हैं।
बनी प्रेरणा की मिसाल
युवती बिरहोर की यह कहानी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले युवा भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं और समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।