विवाह कुत्ते से संपन्न कराया
समाज के बुजुर्गों के अनुसार जिन बच्चों के ऊपर के दांत पहले निकल आते हैं, उसे अशुभ ग्रह का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में भविष्य में किसी अनहोनी या दुर्घटना की आशंका को टालने के लिए परंपरागत रूप से कुत्ते या कुतिया से प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। यह मान्यता वर्षों से चली आ रही है और आज भी समाज के कुछ हिस्सों में प्रचलित है।
पूजा सहित पारंपरिक रस्में निभाई
इस अनुष्ठान में अजय हेंब्रम के चार वर्षीय पुत्र रूपेश हेंब्रम तथा लक्ष्मण सोय के दो वर्षीय पुत्र सूर्य सोय की अलग-अलग बारात निकाली गई। गाजे-बाजे के साथ बस्ती में बारात घुमाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। समधी मिलन, मंगनी, हल्दी और पांव पूजा सहित पारंपरिक रस्में निभाई गईं।
विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया
इसके बाद साड़ पेड़ के नीचे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया। समाज की मान्यता है कि साड़ पेड़ के नीचे विवाह कराने से बच्चों का ग्रह दोष पेड़ ग्रहण कर लेता है और दोष समाप्त हो जाता है। गौरतलब है कि उलीडीह क्षेत्र में 1 मार्च को हरमंगेया पर्व मनाया जाएगा, जहां इसी तरह के पारंपरिक अनुष्ठानों की तैयारी की जा रही है।