Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में हुई हिरासत में मौत की घटनाओं को बेहद गंभीरता से लिया है. अदालत ने इस मामले में गृह सचिव को एक बार फिर व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है. कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि क्या राज्य में हुई ऐसी सभी मौतों की न्यायिक जांच कराई गई है और क्या इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है.
पुराने शपथ पत्र को अदालत ने बताया अस्पष्ट
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि गृह सचिव द्वारा पूर्व में दाखिल किया गया शपथ पत्र पूरी तरह स्पष्ट नहीं था. प्रार्थी के अधिवक्ता शादाब अंसारी ने भी अदालत को बताया कि सरकार की ओर से दी गई जानकारी में यह साफ नहीं है कि किन मामलों में न्यायिक जांच पूरी हुई है. इसी अस्पष्टता को देखते हुए खंडपीठ ने अब विस्तृत और बिंदुवार जानकारी देने का आदेश जारी किया है.
मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट पर सवाल
इससे पहले की सुनवाई में सरकार की ओर से कहा गया था कि जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौतों की सूचना मजिस्ट्रेट को दी गई थी. इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह पता चल सके कि सूचना के बाद मजिस्ट्रेट ने उन मामलों की जांच की थी या नहीं. अदालत ने अब सरकार से उन सभी जांच रिपोर्टों का ब्यौरा मांगा है.
जांच की मांग को लेकर दायर है याचिका
बता दें कि मोहम्मद मुमताज अंसारी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य की जेलों और पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि हिरासत में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई है.